नई दिल्ली : नेशनल हाई अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बिहार में गंगा नदी पर 6 लेन का ब्रिज बनाकर तैयार कर दिया है। आऊंटा (मोकामा) - सिमरिया (बेगूसराय) पुल योजना का सफल निर्माण एक ऐतिसाहिक उपलब्धि है। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर गंगा नदी के ऊपर 6 लेन एक्स्ट्रा-डोज्ड ब्रिज के रूप में तैयार की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लंबाई लगभग 8.15 किमी है और इस पर 1871 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आयी है।
यह पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने के लिए काफी अहम है। इससे न सिर्फ क्षेत्रीय संपर्क यानी कनेक्टिविटी में सुधार होगा, बल्कि यात्रा की दूरी भी घटेगी। यही नहीं इस पुल के बनने से मालवाहक वाहनों को भी रफ्तार मिलेगी, जिससे सामान उत्तर से दक्षिण और दक्षिण से उत्तर तेजी से ट्रैवल करेगा। इस पुल को पुराने राजेंद्र सेतु के समानांतर बनाया गया है, जो दो लेन का रेलवे कम रोड ब्रिज था। यानी लोहे के पुराने राजेंद्र सेतु पर ट्रेनें और बसें दोनों चलती हैं। गंगा नदी पर नए पुल के बन जाने से भारी वाहनों के लिए ज्यादा सुरक्षित और आधुनिक विकल्प मिल जाएगा।
जैसा कि हमने पहले ही बताया इस परियोजना की कुल लंबाई 8.15 किमी है। इसमें गंगा नदी पर 6 लेन एक्स्ट्रा-डोज्ड ब्रिज के साथ 4 लेन का एप्रोच रोड भी शामिल है। इस नए ब्रिज के बन जाने से मौजूदा गांधी सेतु जैसी सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा, जिन पर पहले से ही यातायात का भारी दबाव है।
इस नए ब्रिज के माध्यम से उत्तर बिहार के जिलों जैसे बेगूसराय, सुपौल, मधुबनी, अररिया और दक्षिण बिहार के क्षेत्रों जैसे शेखपुरा, नवादा, लखीसराय आदि के बीच मालवाहक व भारी यातायात की दूरी लगभग 150 किमी घट जाएगी।
उम्मीद की जा रही है कि इस परियोजना से आसपास के जिलों में बेहतर लॉजिस्टिक्स, व्यापार और बाजारों तक आसान पहुंच से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में बढोतरी होगी। इससे क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा। यही नहीं, यह पुल सिमरिया धाम की कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगा। ज्ञात हो कि सिमरिया धाम एक प्रमुख तीर्थस्थल है और प्रख्यात हिंदी कवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि भी है।
