पटना

शिक्षकों के आगे बैकफुट पर बिहार सरकार, सरकारी स्कूलों में छुट्टियों में कटौती का आदेश वापस

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 4, 2023, 09:14 PM IST

Bihar News: शिक्षक संघ ने 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस वाले दिन बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसके अलावा शिक्षक हड़ताल पर भी जाने की तैयारी कर रहे थे, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों की छुट्टियों में कटौती का फरमान वापस ले लिया है।

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नीतीश कुमार

Photo : BCCL

Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों की छुट्टियों में कटौती के बाद सरकार लगातार आलोचना झेल रही है। इसको लेकर शिक्षक संघ भी बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अब सरकार बैकफुट पर आती नजर आ रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, बिहार सरकार ने स्कूलों की छुट्टी में कटौती के फरमान को वापस ले लिया है।

शिक्षा विभाग की ओर से नया नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि राजकीय, प्रारंभिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में निर्गत अवकाश तालिका को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। इसी के साथ शिक्षा विभाग ने संशोधित छुट्टी कैलेंडर को रद्द कर दिया है।

Bihar school holidays

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कई छुट्टियां की गई थी रद्द

बिहार के माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से 29 अगस्त को एक आदेश जारी किया गया था। इसके तहत शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में तीज,रक्षाबंधन,जिउतया की छुट्टी रद्द की गई थी। दुर्गा पूजा,छठ पर मिलने वाली छुट्टी में कटौती हुई थी। 29 अगस्त को शिक्षा विभाग ने संशोधित छुट्टी की सूची जारी की थी, जिसके तहत सितंबर से दिसंबर तक पड़ने वाली 23 छुट्टियों के घटाकर 11 कर दिया गया था। शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए गए आदेश में बताया गया था कि स्कूलों को कम से कम 220 दिन खुलना चाहिए। सभी विद्यालयों में 220 दिन वर्किंग डे होना अनिवार्य है, ऐसा न होने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

शिक्षकों ने दी थी हड़ताल की चेतावनी

बिहार सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद सियासत भी काफी तेज हो गई थी। विपक्षी दल भाजपा ने नीतीश सरकार के इस फैसले का भारी विरोध किया था और नीतीश कुमार पर निशाना भी साधा था। इसके अलावा शिक्षक भी इस फैसले से नाराज थे और शिक्षक संघ ने पांच सितंबर यानी शिक्षक दिवस वाले दिन विरोध प्रदर्शन को लेकर घोषणा भी की थी। इसके अलावा हड़ताल की भी चेतावनी दी थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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