पटना

'मौन' क्यों हैं नीतीश कुमार: राहुल पर भी चुप्पी... क्या बिहार और महागठबंधन में सब ठीक है?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 25, 2023, 02:31 PM IST

बिहार के सियासी गलियारे में एक सवाल फिर से उठने लगा है कि क्या महागठबंधन में सब कुछ ठीक चल रहा है। यह सवाल अनायास ही नहीं खड़ा हुआ है। इसके कई सियासी मायने हैं।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

Photo : PTI

Bihar Politics: बिहार में महागठबंधन की सरकार है। लेकिन क्या महागठबंधन में सब ठीक है? यह सवाल लोगों के मन में फिर से कौंधने लगा है। वजह भी ऐसी है, जिसने बिहार की सियासत में फिर से चहलकदमी बढ़ा दी है। दरअसल, जब से सूरत की अदालत ने राहुल गांधी को सजा सुनाई और उनकी संसद सदस्यता रद्द हुई है, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुप्पी साध ली है।

दूसरी तरफ, सरकार में उनके सहयोगी राजद नेता और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस मुद्दे को लेकर मुखर हैं और विपक्षी एकता का झंडा बुलंद किए हुए हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि बिहार की सियासत में क्या फिर से कुछ नया होने वाला है। दरअसल, यह सवाल अनायास ही नहीं है, पहले भी कई ऐसे मौके रहे हैं, जहां पर जदयू और राजद के बीच अलगाव देखने को मिला है।

राहुल के मसले पर क्यों उठे सवाल

राहुल गांधी की संसद सदस्यता जाते ही देश के लगभग सभी विपक्षी दलों ने भाजपा और केंद्र सरकार की आलोचना की। बिहार विधानसभा में भी राजद, कांग्रेस व अन्य दलों ने विरोध किया। हालांकि, इस प्रदर्शन से जदयू ने दूरी बना ली, वह भी तब जब देश की सियासत में इतनी बड़ी घटना हुई। बता दें, बीते साल भाजपा छोड़ महागठबंधन के साथ जाने वाले नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता की जमकर हिमायत की थी। हालांकि, बीते कुछ दिनों से वह ऐसे मुद्दों पर मौन ही रहे हैं।

एजेंसियों के खिलाफ जांच पर चुप्पी

यह सिर्फ एक मौका नहीं है, जब नीतीश कुमार किसी बड़े मुद्दे पर चुप रहे हैं। इससे पहले जब केंद्रीय जांच एजेंसियों ने लालू परिवार के खिलाफ जांच शुरू की, तब भी नीतीश कुमार काफी दिनों तक इस पर चुप रहे। जबकि, राजद ने इसका जमकर विरोध किया। हालांकि, जब कई तरह के सवाल खड़े होने लगे तब नीतीश कुमार ने अपना पक्ष रखा और कहा, जब-जब राजद हमारे साथ आती है, उन्हें इसी तरह परेशान किया जाता है।

मोकामा व गोपालगंज उपचुनाव से बनाई थी दूरी

इससे पहले बीते साल नवंबर में जब बिहार की मोकामा और गोपालगंज विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने थे, तब भी इसी तरह के सवाल खड़े हुए थे। दोनों ही सीटों पर उपचुनाव प्रचार से नीतीश कुमार दूर रहे थे। उन्होंने चोट का हवाला दिया था। हालांकि, भाजपा ने इसको लेकर कहा था कि नीतीश कुमार ने जानबूझकर ऐसा किया है।

फिर से गुल खिला सकते हैं नीतीश

दरअसल, नीतीश कुमार के बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि वह अपने सियासी विकल्प हमेशा खुले रखते हैं। भले ही नीतीश कुमार इन दिनों राजद के साथ हों, लेकिन कई मौकों पर नीतीश और तेजस्वी के बीच एक राय नहीं देखी गई है। दूसरी, तरह हाल में हुई सियासी घटनाओं ने चर्चओं का बाजार गर्म कर दिया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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