पटना

Bihar New Cabinet: नीतीश कैबिनेट में विभागों का बंटवारा, पुराने मंत्रियों के बदले गए डिपार्टमेंट; जानें किसे क्या मिली जिम्मेदारी?

Bihar Cabinet Expansion: नीतीश कैबिनेट के नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। कई पुराने मंत्रियों का विभाग भी बदला गया है। आइये जानते हैं किसे क्या जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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बिहार मंत्रियों के विभागों का बंटवारा

Bihar Cabinet Expansion: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को अपनी मंत्रिपरिषद में सात नये चेहरों को शामिल किया। ये सभी गठबंधन सहयोगी भाजपा से हैं। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या 36 हो गई है। राजभवन में आयोजित एक समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। जिन विधायकों को मंत्री बनाया गया है उनमें जिबेश कुमार, संजय सरावगी, सुनील कुमार, राजू कुमार सिंह, मोती लाल प्रसाद, विजय कुमार मंडल और कृष्ण कुमार मंटू शामिल हैं। शपथ के बाद गुरुवार को सभी के विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। कई पुराने मंत्रियों का विभाग भी बदला गया है।

कौन बने मंत्री

बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। बिहार में विधानसभा की कुल 243 सीट हैं। नियमों के अनुसार कुल सीट का 15 प्रतिशत ही मंत्री हो सकते हैं। इस लिहाज से राज्य मंत्रिपरिषद में 36 सदस्य ही हो सकते हैं। नये मंत्रियों में शामिल जिबेश कुमार अगस्त 2022 तक राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्य थे, जब मुख्यमंत्री कुमार ने यह आरोप लगाते हुए अचानक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) छोड़ दिया था कि भाजपा उनके नेतृत्व वाले जनता दल (यूनाईटेड) को ‘तोड़ने’ की कोशिश कर रही है। दरभंगा से पांचवीं बार विधायक बने संजय सरावगी और बिहारशरीफ का प्रतिनिधित्व करने वाले सुनील कुमार को भी मंत्री बनाया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गढ़ कहे जाने वाले नालंदा जिले के बिहारशरीफ से वह तीन बार जद(यू) के टिकट पर चुने गए। वह 2015 में भाजपा में शामिल हो गए थे।

कौन कहां से है विधायक

मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज सीट से विधायक राजू कुमार सिंह को भी मंत्री पद से नवाजा गया है। वह भी पहले जद (यू) में थे। उन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में मुकेश सहनी के नेतत्व वाली विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में वीआईपी ने कुल मिलाकर तीन सीट जीती थीं। दो साल पहले उस समय इसके सभी विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, जब सहनी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था।

कुमार की मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए नेताओं में एक और उल्लेखनीय चेहरा सारण जिले के अमनौर के विधायक कृष्ण कुमार मंटू का है। हाल ही में उन्होंने पटना में ‘कुर्मी चेतना रैली’ आयोजित की थी, जिसका उद्देश्य इस ओबीसी समुदाय में भाजपा की पैठ बढ़ाने की थी। नीतीश कुमार खुद कुर्मी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए दो अन्य चेहरों में अररिया जिले के सिकटी से विधायक विजय कुमार मंडल और सीतामढ़ी के रीगा से विधायक मोती लाल प्रसाद शामिल हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिपरिषद के विस्तार में जातिगत समीकरण के साथ ही भाजपा के राजनीतिक समर्थन के आधार वाले क्षेत्रों पर भी खासा ध्यान दिया गया है। ज्ञात हो कि एक दिन पहले ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा ने पटना में पार्टी के कोर समूह के नेताओं के साथ बैठक की थी। नए मंत्रियों में से दो, जिबेश कुमार (भूमिहार) और राजू कुमार सिंह (राजपूत) उच्च जातियों से हैं, जो बिहार में आबादी का 10 प्रतिशत से अधिक हैं, लेकिन दशकों से भाजपा के सबसे वफादार मतदाता रहे हैं। इसके अलावा, सुनील कुमार को छोड़कर सभी गंगा के उत्तर क्षेत्र से आते हैं। इस क्षेत्र में राजग के मुकाबले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

मंत्री दिलीप जायसवाल ने दिया था इस्तीफा

मंत्रिपरिषद में नये चेहरों को ऐसे दिन शामिल किया गया जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और पूर्व राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने पार्टी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति का हवाला देते हुए मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। जायसवाल को पिछले साल जनवरी में जद(यू) अध्यक्ष नीतीश कुमार के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने के बाद गठित नये मंत्रिमंडल में राजस्व और भूमि सुधार विभाग का प्रभार प्रदान किया गया था। जायसवाल जुलाई, 2024 में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्थान पर भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष बनाये गये थे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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