भारतीय रेलवे देश की लाइफलाइन है और वंदे भारत ट्रेनों ने इस लाइफलाइन को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभायी है। देश के तमाम शहरों को जोड़ने के लिए सैकड़ों वंदे भारत ट्रेनें चलाई जा रही हैं। अब तो वंदे भारत स्लीपर की भी शुरुआत हो गई है। वंदे भारत ट्रेनें अपनी रफ्तार, समयबद्धता और विश्वस्तरीय सुविधाओं के लिए जानी जाती हैं। अभी तक जो वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं वह चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी में बनी हैं। अब उत्तर प्रदेश में बनी पहली वंदे भारत ट्रेन फैक्टरी से बाहर आने को तैयार है।
उत्तर प्रदेश में कहां है वंदे भारत की फैक्टरी
उत्तर प्रदेश के राय-बरेली में मॉडर्न कोच फैक्टरी (MCF) नाम की कोच फैक्टरी है, जहां पर वंदे भारत ट्रेनें बनाई जा रही हैं।
MCF से पहली वंदे भारत कब बाहर आएगी
उत्तर प्रदेश के राय-बरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्टरी से पहली वंदे भारत एक्सप्रेसवे कुछ ही दिनों में यानी फरवरी 2026 में बाहर आ सकती है।
जब से वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने के बारे में सोचा गया है, तभी से यह ट्रेनें चेन्नई में बन रही हैं। अब जल्द ही रायबरेली की MCF से पहली वंदे भारत एक्सप्रेस बाहर निकलने को तैयार है। MCF के अधिकारी इसे उत्तर भारत में बनी पहली वंदे भारत ट्रेन कह रहे हैं। MCF रायबरेली और रेल कोच फैक्टरी कपूरथला के जनरल मैनेजर पीके मिश्रा का कहना है कि यह उत्तर भारत में बनी पहली वंदे भारत ट्रेन होगी।
वंदे भारत की स्पीड
केंद्र सरकार के मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत साल 2018 में पहली वंदे भारत एक्सप्रेस सामने आई थी। आज वंदे भारत एक्सप्रेस, देश के आधुनिक रेलवे नेटवर्क का चेहरा बन गई है। वंदे भारत ट्रेनों को मध्यम से लंबी दूरी के सफर के लिहाज से डिजाइन किया गया है। यह ट्रेन अधिकतम 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, जबकि टेस्ट के दौरान इसने 180 किमी की रफ्तार को भी छुआ था। वंदे भारत चलने के बाद देश के तमाम बड़े-बड़े शहरों के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आयी है।
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MCF की पहली वंदे भारत ट्रेन
वंदे भारत ट्रेन के कोच के नीचे ही प्रपल्शन इक्विपमेंट लगाए गए हैं और हर दूसरे कोच में मोटर लगी है, जिसके कारण इन ट्रेनों को लोकोमोटिव की जरूरत नहीं होती। ट्रेन के दोनों तरफ ड्राइविंग कैब होती है, जिसके कारण इसे वापसी में रिवर्स करने की जरूरत भी नहीं होती है। MCF के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर आरएन तिवारी ने कहा कि रायबरेली में बनी वंदे भारत 16 कोच की चेयर कार होगी, जिसमें कुल 1128 यात्रियों के बैठने की जगह होगी।
रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्टरी का स्थापना साल 2007 में हुई थी। लालगंज में मौजूद इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 3192 करोड़ रुपये है। इस फैक्टरी में एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए हमसफर, तेजस और अन्य एसी-नॉन एसी कोच सहित हर साल 1000 से ज्यादा कोच बनाने की क्षमता है। MCF ने दिसंबर 2025 तक 15000 पैसेंजर कोच बनाए। वित्त वर्ष 2024-25 में पैक्टरी ने 2025 कोच बनाने का रिकॉर्ड बनाया।
