नोएडा

बहन से वीडियो कॉल के बाद फांसी पर लटका युवक, पुलिस जांच में जुटी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 16, 2023, 09:29 AM IST

Noida News in Hindi: जांच में पता चला है कि युवक ओडिशा का रहने वाला था और उसकी पहचान चंद्रशेखर विस्वाल के रूप में हुई है। वह नोएडा के सेक्टर 135 स्थित नंगली वाजिदपुर गांव में किराए पर रहता था।

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Noida Crime

Photo : iStock

Noida News: नोएडा के एक्सप्रेस-वे थाना क्षेत्र के रहने वाले एक युवक ने आत्महत्या कर ली। पुलिस को युवक का शव उसके कमरे की छत से लटका हुआ मिला। अधिकारियों का कहना है कि युवक ने आत्महत्या से पहले अपनी बहन को वीडियो कॉल किया था और कुछ देर बाद ही उसने यह कदम उठाया।

जांच में पता चला है कि युवक ओडिशा का रहने वाला था और उसकी पहचान चंद्रशेखर विस्वाल के रूप में हुई है। वह नोएडा के सेक्टर 135 स्थित नंगली वाजिदपुर गांव में किराए पर रहता था। पुलिस का कहना है कि मौके पर कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस को युवक की आत्महत्या के बारे में उसके भाई से जानकारी मिली थी।

बहन को दी थी जानकारी

पुलिस ने बताया, प्रथम दृष्टया लगता है कि युवक किसी बात से तनाव में था। उसने आत्महत्या से पहले अपनी बहन को वीडियो कॉल किया था और उसे अपने इस कदम के बारे में बताया था। इसके बाद उसकी बहन ने अपने रिश्ते के भाई को फोन कर मौके पर भेजा, हालांकि, तब तक युवक फांसी लगा चुका था। एक्सप्रेसवे पुलिस स्टेशन प्रभारी सरित मलिक ने बताया, पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर युवक को अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया, युवक के मृत शरीर का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है।

परिवारीजनों ने कार्रवाई से किया इंकार

पुलिस का कहना है कि घटना के बाद युवक के परिवारीजनों को सूचित कर दिया गया है। वे इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं चाहते हैं। उन्होंने बताया, युवक का शव कानूनी प्रक्रिया से बाद अंतिम संस्कार के लिए ओडिशा रवाना किया जाएगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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