नोएडा

सुधरेगा ट्रैफिक का जाल: 2 जोन और 7 सर्किल में बंटा Noida, ACP स्तर के अधिकारी संभालेंगे कमान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 22, 2023, 11:44 AM IST

Noida Traffic: गौतमबुद्ध नगर की पुलिस उपायुक्त (यातायात) सुनीति ने कहा, दो एसीपी प्रत्येक जोन की देखभाल करेंगे। इनमें आने वाले सर्किल लिए यातायात निरीक्षक (ट्रैफिक इंस्पेक्टर) तैनात किए गए हैं।

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नोएडा ट्रैफिक

Noida Traffic: गौतम बुद्ध नगर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुगम करने के लिए पूरे ट्रैफिक सिस्टम को पुनर्गठित किया गया है। खास तौर पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यातायात को ध्यान में रखते हुए जिले को दो जोन में बांटा गया है। दोनों जोन में सात सर्किल होंगे। यातायात व्यवस्था को मजबूत और सड़कों पर ट्रैफिक के दबाव हो कम करने के लिए पुलिस कमिश्नर की ओर से यह फैसला लिया गया है।

दोनों जोन की जिम्मेदारी एसपी स्तर के अधिकारी को दी गई है। गौतमबुद्ध नगर की पुलिस उपायुक्त (यातायात) सुनीति ने कहा, दो एसीपी प्रत्येक जोन की देखभाल करेंगे। इनमें आने वाले सर्किल लिए यातायात निरीक्षक (ट्रैफिक इंस्पेक्टर) तैनात किए गए हैं। प्रत्येक सर्किल तीन से चार पुलिस स्टेशन क्षेत्रों को कवर करेगा।

जोन 1 व जोन 2 में आएंगे ये सर्किल

नोएडा क्षेत्र में जोन 1 के तहत चार सर्किल होंगे। इसमें सर्किल 1 में फेज 1, थाना सेक्टर 20, सेक्टर 24 होंगे। सर्किल 2 में सेक्टर 24, सेक्टर 63, फेस 3, सेक्टर 113 और सेक्टर 58 होंगे। सर्किल 3 में सेक्टर 126, सेक्टर 39, एक्सप्रेस होगा। वहीं सर्किल 4 में फेस 2, सेक्टर 49 और सेक्टर 142 होंगे। इसी तरह जोन 2 के अंतर्गत आने वाले ग्रेटर नोएडा क्षेत्रों में तीन ट्रैफिक सर्कल होंगे। इसमें सर्कल 5 में इकोटेक 3, बिसरख, बादलपुर, दादरी, जारचा शामिल हैं। सर्कल 6 में सूरजपुर, नॉलेज पार्क, बीटा 2 और कासना क्षेत्र हैं। और सर्कल 7 में इकोटेक 1, दनकौर, रबूपुरा और जेवर हैं।

पांच हजार लोगों पर एक पुलिस कर्मी

जानकारी के मुताबिक, गौतम बुद्ध नगर में 500 ट्रैफिक पुलिसकर्मी हैं। इसमें दो एसीपी, सात इंस्पेक्टर, 70 सब इंस्पेक्टर, 230 हेड कॉन्स्टेबल और 205 कॉन्स्टेबल शामिल हैं। नोएडा के यातायात निरीक्षक आशुतोष सिंह ने बताया कि पहले, हम आवश्यकता पड़ने पर यातायात कर्मियों को तैनात करते थे। अब ट्रैफिक पुलिसकर्मी अपने-अपने क्षेत्र में तैनात रहेंगे। इससे यातायात संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया, गौतमबुद्ध नगर परिवहन विभाग में 8,76,679 वाहन पंजीकृत हैं, जिनमें 5,32,001 दोपहिया, 2,60,456 चार पहिया (निजी), 2,444 दोपहिया (वाणिज्यिक), 13,041 कैब, 21,395 माल वाहक, 19,055 ऑटो, 10,814 शामिल हैं। ई-रिक्शा, 3,248 बसें, 1,621 स्कूल बसें, 579 एम्बुलेंस, 7,804 ट्रैक्टर, 1,817 तिपहिया (माल) और 2,404 अन्य वाहन शामिल हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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