नोएडा

नोएडा अथॉरिटी अवैध रूप से बना रही कूड़े का पहाड़, गुस्साए लोगों ने NH-24 किया जाम

Mountain of Garbage: लोगों का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी प्राइवेट वेंडर के साथ मिलकर अवैध रूप से कूड़े का पहाड़ बना रही है। अथॉरिटी पर करीब 5 लाख लोगों की जान से खेलने का आरोप लगाया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि शिकायत करने के बाद भी अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

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नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन।

Noida: इंदिरापुरम , न्याय खंड -1 के पांच रेजीडेंशियल सोसाइटी में रहने वाले परिवारों ने नोएडा अथॉरिटी और पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल पिछले कुछ समय से इन सोसाइटी में रहने वाले रेजिडेंट गैर कानूनी रूप से कूड़ा डंपिंग के खिलाफ नोएडा प्रशासन को शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इसका कोई समाधान नहीं निकला है।

नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

नेशनल हाईवे 24 से सटे हुए खोड़ा पुलिस चौकी के नजदीक नोएडा अथॉरिटी अवैध कूड़ा घर बना रहा है। गाजीपुर स्थित कूड़े के पहाड़ से अभी निजात मिली नहीं थी कि नोएडा अथॉरिटी ने सेक्टर -62 में एक और कूड़े का पहाड़ बनाने की तैयारी कर ली है।

आलम ये है कि आस पास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों का बदबू की वजह से रहना मुश्किल हो गया है। कई तरह की बीमारियों का भी खतरा है, लेकिन नोएडा प्रशासन इस समस्या का समाधान निकालने के लिए बिल्कुल भी गंभीर नजर नहीं आ रहा। अथॉरिटी की घोर लापरवाही से परेशान हजारों की संख्या में रेजिडेंट ने भारी विरोध प्रदर्शन किया।

आक्रोशित लोगों ने NH-24 को किया जाम

काफी समय तक NH-24 को जाम किया जिससे यातायात प्रभावित हुई। इसके अलावा डंपिंग साइट, खोड़ा पुलिस चौकी पर भी विरोध प्रदर्शन किया। आपको बता दें की न्याय खंड -1 में Gaurav green Vista, Supertech icon, V3S, Patrakar Vihar, Janta Flat, Amrapali Village जैसी हाउसिंग सोसाइटी में करीब 5000 हज़ार से भी ज्यादा परिवार रहती है।

इन सोसाइटी में रहने वाले लोगों का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी प्राइवेट वेंडर के साथ मिलकर अवैध रूप से कूड़े का पहाड़ बना रही है। गौड़ ग्रीन विष्टा के जनरल सेक्रेटरी राकेश पांडेय का कहना है कि नोएडा अथॉरिटी जान बूझकर इस इलाके में रहने वाले करीब 5 लाख लोगों की जान से खेल रही है। शिकायत करने के बाद भी अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है, लिहाजा हजारों की संख्या में इकठ्ठा होकर हमने विरोध प्रदर्शन किया। फिर भी कोई समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही रेजिडेंट इस मामले पर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने का विचार कर रहे हैं ।

रेजिडेंट्स ने इस मौके पर पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और समाधान नहीं निकलने की सूरत में फिर से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया। इस मौके पर पांचों सोसाइटी के RWA के सदस्य और रेजिडेंट मौजूद रहे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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