Rajasthan News: राजस्थान सरकार ने सरकारी नौकरी को लेकर एक अहम फैसला लिया था। इस फैसले के तहत दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। राजस्थान सरकार ने परिवार नियोजन को बढ़ावा देते हुए ये फैसला लिया है। सुप्रिम कोर्ट ने भी राजस्थान सरकार के इस फैसले पर मुहर लगाई और इसे गैर-भेदभावपूर्ण बताया है। इससे पहले राजस्थान पंचायत चुनाव को लड़ने के लिए ऐसा ही नियम लाया गया था। उस दौरान भी सुप्रिम कोर्ट ने नियम को सही ठहराया था और आज भी इस नियम को सही ठहराया है।
दो से अधिक बच्चे होने पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
पूर्व सैनिक रामजी लाल जाट के रक्षा सेवा से सेवानिवृत होने के बाद 2018 में राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया था। लेकिन उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया गया। उम्मीदवारी राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 के 24 (4) के तहत खारिज की गई थी। बताया जा रहा है कि 1 जून 2002 के बाद रामजी लाल जाट के दो से अधिक बच्चे थे और राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम 1989 के अनुसार 1 जून 2002 में या उसके बाद दो से अधिक बच्चे होने पर उम्मीदवार सरकारी नौकरी का पात्र नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर
राजस्थान सरकार ने दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी नहीं देने का एक बड़ा फैसला लिया था। इस फैसले को सुप्रिम कोर्ट में पूर्व सैनिक रामजी लाल जाट ने चुनौती दी है। इससे पहले ये मामला हाई कोर्ट में भी था। हाई कोर्ट में भी राजस्थान सरकार के दो बच्चों से अधिक होने पर सरकारी नौकरी नहीं देने के नियम को सही ठहराया गया था। इस मामले की सुनवाई 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ द्वारा की गई।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए 2022 में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपना फैसला सुनाया और पूर्व सैनिक रामजी लाल जाट की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रिम कोर्ट ने कहा कि दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से इनकार करने वाला ये नियम भेदभाव नहीं है। इसका मकसद परिवार नियोजन है। सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को गैर-भेदवाभपूर्ण भी बताया है।
