वेस्ट यूपी के लिए बेस्ट न्यूज, यहां बनेगी 5000 TCD कैपेसिटी वाली नई कॉपरेटिव शुगर मिल; किसानों को होगा बड़ा फायदा
- Edited by: Pushpendra Kumar
- Updated Feb 9, 2026, 01:32 PM IST
उत्तर प्रदेश के बागपत में नई सहकारी चीनी मिल के निर्माण के लिए मंजूरी मिल गई है। नई चीनी मिल की स्थापना का प्रमुख आधार कमांड एरिया में गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता है। आकलन के अनुसार अगले पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख टन गन्ना पेराई के लिए उपलब्ध रहेगा।
बागपत सहकारी सुगर मिल (फोटो-Istock)
बागपत : पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए बागपत में 5000 टीसीडी क्षमता की नई सहकारी चीनी मिल को मंजूरी दी गई है। किसान सहकारी चीनी मिल, बागपत की पेराई क्षमता को 2500 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 5000 टन प्रतिदिन (टीसीडी) करने और नवीनतम तकनीक पर आधारित रिफाइन्ड शुगर उत्पादन के लिए नई चीनी मिल स्थापित करने के संशोधित प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है।
बागपत सहकारी चीनी मिल की लागत
इस परियोजना के विकास के लिए कुल अनुमानित लागत लगभग 407 करोड़ रुपए है। परियोजना का वित्त पोषण 50 प्रतिशत राज्य सरकार की अंश पूंजी और शेष 50 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा ऋण के रूप में किया जाएगा। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 10,000 लाख रुपये (100 करोड़ रुपये) के ऋण प्रावधान के लिए शीघ्र प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नई चीनी मिल की स्थापना का प्रमुख आधार कमांड एरिया में गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता है। आकलन के अनुसार अगले पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख टन गन्ना पेराई के लिए उपलब्ध रहेगा। वर्तमान में मिल की मशीनरी 30 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी है, जिससे स्टीम और बैगास की अधिक खपत हो रही है।
पेराई सत्र 2024-25 के दौरान मिल द्वारा 4.49 लाख टन गन्ने की पेराई की गई थी, जबकि शेष गन्ना निजी क्षेत्र की चीनी मिलों को गया। नई मिल में आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे संचालन क्षमता और ऊर्जा दक्षता में सुधार होगा।
अधिकारियों के अनुसार, 5000 टीसीडी क्षमता की पेराई औसतन 22 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे पेराई सत्र की अवधि कम होगी और किसानों के गन्ने की समय पर पेराई सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे गन्ना मूल्य भुगतान में भी सुगमता आएगी। परियोजना के अंतर्गत 100 टीपीएच, 67 बार हाई प्रेशर बॉयलर, 10 मेगावाट पावर टरबाइन और एसीवीएफडी (वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव) मोटरों का उपयोग किया जाएगा। इससे स्टीम खपत में कमी आएगी, ऊर्जा की बचत होगी और बैगास की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
क्या होगा फायदा
अधिकारियों ने बताया कि रिफाइंड शुगर उत्पादन से चीनी की गुणवत्ता में सुधार होगा। डीसीएस आधारित ऑटोमेशन प्रणाली के माध्यम से सल्फर युक्त चीनी के स्थान पर रिफाइंड शुगर का उत्पादन किया जाएगा, जिससे चीनी हानियों पर नियंत्रण और उत्पादन लागत में कमी आएगी। इस परियोजना से क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे, किसानों की आय में वृद्धि होगी और राज्य के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के समग्र विकास को बल मिलेगा।
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