मुंबई: शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के विरोध में सोमवार को महाराष्ट्र के कई शहरों में प्रदर्शन हुए। मुंबई, ठाणे, नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित इन प्रदर्शनों में विभिन्न संगठनों, छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP (SP)] ने सोमवार को मुंबई यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई।
'शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई लोकतंत्र पर हमला'
मुंबई यूनिट के अध्यक्ष और पूर्व विधायक मिलिंद अन्ना कांबले,युवा विंग के मुंबई अध्यक्ष अमोल माटेले और वैभव गढावे के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में पार्टी कार्यकर्ताओं और छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान मिलिंद अन्ना कांबले ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
कांबले ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विवादों और कथित परीक्षा घोटालों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो देश का युवा लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगा।
नवी मुंबई और ठाणे में भी प्रदर्शन
पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने नवी मुंबई में आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि NEET पेपर लीक प्रकरण से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और इससे निराशा का माहौल बना। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस विवाद से जुड़े तनाव के कारण 21 मेडिकल अभ्यर्थियों ने आत्महत्या कर ली। शिंदे ने कहा कि इस पूरे मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेने के बजाय केंद्र सरकार और प्रशासन ने सोनम वांगचुक के साथ ऐसा व्यवहार किया,जो लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उधर, ठाणे कलेक्टर कार्यालय के बाहर भी एनसीपी एसपी ने प्रदर्शन किया। इसका नेतृत्व पार्टी के ठाणे जिला अध्यक्ष मनोज प्रधान और विधायक जितेंद्र आव्हाड ने किया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन
इसके अलावा, शिक्षा क्षेत्र में कथित अनियमितताओं और परीक्षा के पर्चे लीक होने के मामलों को लेकर सोमवार को छत्रपति संभाजीनगर के क्रांति चौक पर छात्रों और वकीलों ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने कहा कि वह राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) की तैयारी कर रही थी और चाहती थी कि सरकार यह स्पष्ट करे कि वह परीक्षा का पर्चा लीक होने के मामले में किसी को जवाबदेह ठहराने के लिए तैयार क्यों नहीं है। एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल से वांगचुक को हटाने में जल्दबाजी दिखाने के बजाय, केंद्र सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने में तेजी दिखानी चाहिए थी।
इस दौरान प्रदर्शन में भाग लेने वाले वकीलों ने नयी दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी’(कॉजपा) के नेतृत्व में निकाले गए ’संसद चलो’ मार्च में शामिल लोगों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे लोगों को उनसे सवाल करने का कोई अधिकार ही नहीं है।
कॉजपा के संसद मार्च के समर्थन में नागपुर में प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के समर्थन में सोमवार को नागपुर में भी सैकड़ों छात्रों, युवाओं और बुजुर्गों ने प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
नीट यूजी परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक के विरोध में सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए छात्र, युवा और वरिष्ठ नागरिक संविधान चौक पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने संकल्प लिया कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
केंद्र सरकार को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें लेह-लद्दाख के पर्यावरण की सुरक्षा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और कथित तौर पर परीक्षा विवाद के कारण जान गंवाने वाले 21 युवाओं के परिवारों को मुआवजा देने की मांग शामिल थी।
