राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि नारी केवल समाज की आधारशिला ही नहीं,बल्कि राष्ट्र के भविष्य की निर्माता भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षित,आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाएं किसी भी देश के विकास की सबसे बड़ी शक्ति होती हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला विचारकों के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती -नारी से नारायणी'के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं। सात और आठ मार्च को आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिला विचारकों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को केवल परिवार की संरक्षक नहीं,बल्कि ज्ञान,शक्ति और समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा गया है। उन्होंने कहा कि आज की भारतीय महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल,उद्यमिता और सामाजिक सेवा जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को समान अवसर,सम्मान और सुरक्षा मिले। महिलाओं को निर्णय लेने की स्वतंत्रता,आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर और शिक्षा तथा रोजगार के समान अवसर मिलना बेहद जरूरी है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत में महिला-नेतृत्व वाले विकास की अवधारणा तेजी से आगे बढ़ रही है। उन्होंने युवतियों से अपने सपनों को साकार करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
इस मौके पर राष्ट्र सेविका समिति की मुख्य संचालिका वी. शांता कुमारी ने कहा कि महिलाओं को समाज से मिलने वाले प्रोत्साहन का उपयोग करते हुए अपने ज्ञान और क्षमता के बल पर समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान देना चाहिए।
सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और शरण्या संगठन ने किया, जिसमें देशभर से लगभग 1500 महिला विचारकों ने भाग लिया और महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
