मुंबई

महाराष्ट्र में आदमखोर बाघों ने मचाया तांडव, 2 लोगों को बनाया निवाला

महाराष्ट्र के चंद्रपुर स्थित ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघ के हमलों के कारण दो लोगों की जान चली गई। वन विभाग ने इस घटना के बाद सतर्कता बढ़ाने के साथ ही प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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(सांकेतिक फोटो)

चंद्रपुर : जिले में ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में रविवार को बाघ ने दो लोगों पर हमला कर दिया, जिससे वो बुरी तरह घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। पहली घटना में वधोना गांव के 64 वर्षीय मारोती शेंडे पर ब्रह्मपुरी वन प्रभाग के तलोधी वन क्षेत्र में हमला हुआ, जहां वे तेंदू पत्ते इकट्ठा कर रहे थे। घायल शेंडे को तुरंत सिंदेवाही के ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। दूसरी घटना मुल तहसील के शिवपुर-चेक गांव के निवासी रुशी पेंडोर की है, जो शनिवार को लापता हो गए थे। तलाशी अभियान के दौरान उनका शव बफर जोन के मुल रेंज में मिला, और अधिकारियों ने पुष्टि की कि उनकी मौत भी बाघ के हमले से हुई।

10 मई से 8 लोगों की मौत

जानकारी के मुताबिक, 10 मई से अब तक चंद्रपुर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण कुल आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें सिंदेवाही तहसील में तीन महिलाओं पर हुए हमले भी शामिल हैं। वन विभाग ने स्थानीय लोगों को जंगल में सावधानी बरतने की सलाह दी है और बाघों के बफर जोन में आने को सामान्य बताया है। स्थानीय लोग इन हमलों से भयभीत हैं और प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग कर रहे हैं। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं, समूह में जाएं और वन कर्मचारियों को सूचित करें। ये घटनाएं मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां जंगल और मानव बस्तियां निकट हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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