Mumbai News: महाराष्ट्र का त्र्यंबकेश्वर मंदिर भारत के पुराने मंदिरों में से एक है। यह नासिक शहर से लगभग 28 किमी दूर स्थित है। त्र्यंबकेश्वर मंदिर के प्रति तमाम भक्तों की खास श्रद्धा रही है। यही वजह है जो रोजाना यहां हजारों भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। इस मंदिर में दर्शन से लिए दुनियाभर से श्रद्धालुओं आते हैं। लेकिन आने वाले 8 दिनों तक अब त्र्यंबकेश्वर मंदिर के भक्त दर्शन नहीं कर सकेंगे। यह मंदिर 5 जनवरी से आठ दिनों तक बंद रहेगा। इस बात की जानकारी श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट के सचिव और त्र्यंबक नगर पालिका के सीईओ संजय जाधव ने दी है।
उन्होंने बताया कि इन आठ दिनों तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) मंदिर के ज्योतिर्लिंग के रखरखाव का काम करेगा। जाधव ने कहा है कि इस आठ दिनों की अवधि के दौरान किसी भी श्रद्धालु को मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। त्र्यंबकेश्वर मंदिर, भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह ब्रह्मगिरी पहाड़ी के तल पर स्थित है। मुंबई से इसकी दूरी करीब 173 किलोमीटर है।
त्र्यंबकेश्वर के इतिहास में पहली बार बंद होगा मंदिर
जाधव के अनुसार औसतन महाराष्ट्र और देश के अलग-अलग हिस्सों से 20,000 से ज्यादा भक्त हर रोज मंदिर आते हैं। त्र्यंबकेश्वर मंदिर में श्रावण और महा शिवरात्रि के महीने में भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। जाधव के मुताबिक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञ ज्योतिर्लिंग को किसी तरह की क्षति से बचाने के लिए उस पर नया लेप लगाएंगे। हैरान कर देने वाली बात यह है कि त्र्यंबकेश्वर के इतिहास में यह पहली बार है कि मंदिर इतनी लंबी अवधि के लिए भक्तों के लिए बंद रहेगा।
मंदिर प्रथागत दैनिक पूजा जारी रहेगी
हालांकि कोविड महामारी के दौरान मंदिर को लंबे समय के लिए बंद कर दिया गया था, लेकिन वह कोविड महामारी से संबंधित प्रतिबंधों के कारण था। लेकिन सामान्य समय में मंदिर कभी बंद नहीं हुआ था। क्योंकि यह अब 5 जनवरी से बंद होगा। ऐसे में भक्तों को मंदिर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि इन आठ दिनों के दौरान ज्योतिर्लिंग की प्रथागत दैनिक पूजा जारी रहेगी। जिसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के श्री त्र्यंबकेश्वर देवस्थान ट्रस्ट को अनुमति दी हुई है।
