Maharashtra Politics: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में रविवार (दो जुलाई, 2023) को बड़ी फूट हुई, जिससे पार्टी के मुखिया शरद पवार को तगड़ा झटका लगा। उन्होंने इस मसले पर सीधा सवाल उठाया और पूछा कि चार साल पहले जब हम चुनाव लड़ रहे थे, तब हमारा निशाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। हम उस दौरान पीएम का निशाना थे। हालांकि, अब चार साल तक (उनका) विरोध करने के बाद आज अचानक क्या हो गया? असल बात यह है कि वह (भतीजे अजित पवार) जाना चाहते थे, क्योंकि उन्हें सत्ता की जरूरत थी।
शिंदे सरकार का हिस्सा बनने वाले विधायकों की आलोचना करते हुए पवार ने कहा कि वह यह नहीं समझ पाए कि (2019 के विधानसभा चुनावों के बाद) बीते चार साल में क्या बदलाव हुआ। वह जनता के बीच जाएंगे और दिखाएंगे कि यह घटनाक्रम लोगों को रास न आया।
शरद ने इसके अलावा सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने दावा किया कि यह घटनाक्रम कोई ‘‘गुगली’’ नहीं बल्कि ‘‘डकैती’’ है। यह आसान चीज नहीं है। पीएम (मोदी) ने पार्टी पर जो आरोप लगाए थे...अब (उन्होंने) उनमें से कुछ को आरोपों से दोषमुक्त करने का महत्वपूर्ण काम किया है।
पवार ने इसके साथ ही साफ किया कि वह एनसीपी में नया नेतृत्व तैयार करेंगे। पार्टी में जब ऐसे हालात पैदा होते हैं तो उन्हें काम करने के लिए ज्यादा ऊर्जा मिलती है। उन्होंने इसके साथ ही बताया कि वह भविष्य के लिए भी पार्टी का चेहरा हैं।
दरअसल, शरद पवार की ओर से साल 1999 में एनसीपी की स्थापना की गई थी। रविवार को इसे तब फूट का सामना करना पड़ा, जब उनके भतीजे अजित के साथ पार्टी के नौ विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शामिल हो गए। नौ लोगों में शरद के वफादार कहलाने वाले छगन भुजबल और दिलीप वालसे पाटिल भी हैं।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे अजित ने रविवार को उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं सहित उनकी पार्टी के आठ विधायकों को शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री के रूप में शामिल किया गया।
