मुंबई

थाईलैंड ट्रिप को छिपाने के लिए छात्रा ने पासपोर्ट के फाड़े पन्ने, झूठ बोलने पर मुंबई एयरपोर्ट पर धरी गई

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित एयरपोर्ट पर धोखाधड़ी करने के मामले में एक 25 वर्षीय फैशन मर्चेंडाइजिंग छात्रा को रोक लिया गया। छात्रा सिंगापुर जा रही थी।

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प्रतिकात्मक फोटो

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

मुंबई: मुंबई हवाई अड्डे पर गुरुवार को सिंगापुर के लिए फ्लाइट पकड़ने से पहले एक 25 वर्षीय फैशन मर्चेंडाइजिंग छात्रा एसएस घाटोल को रोक लिया गया। आव्रजन अधिकारियों को पता चला कि उसके पासपोर्ट में चार पन्ने गायब हैं, जिसके कारण उसे गिरफ्तार कर लिया गया। प्रथम वर्ष की छात्रा वर्ली में अपने संस्थान की ओर से प्रायोजित इंटर्नशिप के लिए पर्यटक वीजा पर यात्रा करने जे रही थी। पुलिस के अनुसार, उसने थाईलैंड की पिछली यात्रा को छिपाने के लिए पन्ने हटा दिए थे, जो 11 से 14 फरवरी तक हुई थी। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, उस अवधि के दौरान, घाटोल ने एक परीक्षा से बचने के लिए झूठा दावा किया था कि वह अस्वस्थ थी।

खुलासे से बचने के लिए फाड़े पन्ने

सहायक आव्रजन अधिकारी सुजीत पाटिल ने कहा कि घाटोल को डर था कि जब संस्थान ने सिंगापुर इंटर्नशिप के लिए शॉर्टलिस्ट होने के बाद उसके पासपोर्ट का अनुरोध किया तो उसके धोखे का खुलासा हो जाएगा। सतारा के 33 वर्षीय व्यवसायी तुषार पवार को अपनी पत्नी से थाईलैंड की कई यात्राओं को छिपाने के लिए अपने पासपोर्ट में कथित रूप से बदलाव करने के आरोप में शनिवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।

एचटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आव्रजन ब्यूरो की अधिकारी आस्था मिथल ने बैंकॉक की निर्धारित उड़ान से पहले नियमित जांच के दौरान पवार के पासपोर्ट में अनियमितताएं देखीं, जिसके बाद गिरफ्तारी की गई। बारीकी से जांच करने पर पता चला कि पवार ने मुहर लगे 12 पन्ने हटा दिए थे और उनकी जगह खाली पन्ने रख दिए थे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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