मुंबई

सीएम शिंदे ने टाइम्स नाउ के पत्रकार हर्षल भदाणे के परिवार को सौंपा 10 लाख का चेक, सड़क दुर्घटना में हुई थी मौत

टाइम्स नाउ मराठी के पत्रकार हर्षल भदाणे की धुले-औरंगाबाद हाईवे पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। महाराष्ट्र सरकार की ओर से उनके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री शिंदे ने हर्षल भदाणे की पत्नी के नाम 10 लाख रुपये का चेक टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन को सौंपा।

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पत्रकार हर्षल भदाणे के परिवार की मुख्यमंत्री शिंदे ने की आर्थिक सहायता।

Photo : Times Now Digital

टाइम्स नाउ मराठी के वरिष्ठ संवाददाता हर्षल भदाणे की 29 जुलाई को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हर्षल भदाणे के परिवार की मदद के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की है। मुख्यमंत्री शिंदे ने हर्षल भदाणे की पत्नी के नाम 10 लाख रुपये का चेक टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन को सौंपा। मुख्यमंत्री के साथ ही उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पत्रकार हर्षल भदाणे की मौत पर दुख जताया है।

टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सह्याद्री गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस से मुलाकात की और सड़क दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर पर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि पत्रकार हर्षल भदाणे पाटिल की मौत के लिए जिम्मेदार ट्रक ड्राइवर, ट्रक क्लीनर और ट्रक मालिक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा। गृह मंत्री ने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन की मांग को भी मंजूरी दे दी है।

धुले-औरंगाबाद हाईवे पर हुआ था हादसा

29 जुलाई की रात पत्रकार हर्षल भदाणे की धुले-औरंगाबाद हाईवे पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। यह हादसा तब हुआ जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को पीछे से टक्कर मार दी। इस हादसे में दो अन्य लोग घायल हो गए थे। हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर मौके से भाग निकला था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

परिवार में अकेले कमाने वाले थे हर्षल

बता दें, हर्षल भदाणे टाइम्स नाउ मराठी चैनल में वरिष्ठ संवाददाता के पद पर कार्यरत थे। डेढ़ साल पहले ही उनकी शादी हुई थी और वह अपने परिवार में कमाने वाले अकेले शख्स थे। परिवार में उनके पीछे उनकी पत्नी और बूढ़े माता और पिता हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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