मुंबई: मराठा आरक्षण को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में जारी आंदोलन पर सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि आंदोलनकारियों की चिकित्सा और भोजन की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की जाए, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस धरने को कोई अनुमति प्राप्त नहीं है। ऐसे में सरकार चाहे तो कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकती है और ज़रूरत पड़ने पर सड़कें खाली कराई जा सकती हैं।
अदालत ने आंदोलनकारी नेता मनोज जरांगे की बिगड़ती तबीयत पर चिंता जताई और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि मानवता के नाते सरकार की जिम्मेदारी है कि किसी भी आंदोलनकारी की जान को खतरा न हो।
जरांगे ने भूख हड़ताल के साथ पानी भी त्यागने का ऐलान किया
इस बीच, जरांगे ने भूख हड़ताल के साथ पानी भी त्यागने का ऐलान कर दिया है, जिससे आंदोलन का स्वरूप और आक्रामक होता जा रहा है। दूसरी ओर, रविवार देर रात लातूर से आए एक आंदोलनकारी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिसने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया।
आंदोलन का असर पूरे मुंबई में
आंदोलन का असर पूरे मुंबई में दिखाई दे रहा है। सीएसएमटी और आझाद मैदान के आसपास ट्रैफिक जाम, रूट डायवर्जन और कई स्कूलों के बंद रहने से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। पुलिस ने नागरिकों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने और सावधानी बरतने की अपील की है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण का समाधान केवल कानूनी दायरे में रहकर ही संभव है। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की अध्यक्षता में समिति ऐतिहासिक दस्तावेजों और गजट रेकॉर्ड्स की जांच कर रही है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर तय की है। तब तक सरकार पर दबाव है कि वह आंदोलनकारियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों सुनिश्चित करे।
