मुंबई

2024 में BJP और शिंदे गुट अलग-अलग लड़ेंगे चुनाव! अपनाया जा सकता है '2019' का फार्मूला

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 26, 2023, 07:44 PM IST

Lok Sabha Election: शिवसेना ने पिछली बार 48 में से 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 18 पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा ने 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 23 पर जीत हासिल की थी। उद्धव गुट वाली शिवसेना का कहना है कि इस बार भी सीटों के बंटवारे को लेकर 2019 का फार्मूला अपनाया जा सकता है।

Image

महाराष्ट्र में अपनाया जा सकता है 2019 का फार्मूला

Photo : PTI

Lok Sabha Election: 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में तैयारी शुरू हो चुकी है। भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) सीटों के बंटवारे को लेकर 2019 के फार्मूले को अपनाने पर विचार कर रहे हैं। शिवसेना के वरिष्ठ नेता गजानन कीर्तिकर ने इस बात के संकेत भी दिए हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

शिवसेना के वरिष्ठ नेता गजानन कीर्तिकर ने शुक्रवार को कहा कि एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीट बंटवारे की व्यवस्था 2019 की तरह ही रहेगी। शिवसेना ने पिछली बार 48 में से 22 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 18 पर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा ने 26 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 23 पर जीत हासिल की थी। इस बार भी सीट बंटवारे की यही व्यवस्था रहेगी। हमने 2024 के चुनावों के लिए पहले ही तैयारी शुरू कर दी है।

2019 में नहीं हुआ था शिवसेना का बंटवारा

बता दें, शिवसेना और भाजपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव गठबंधन में लड़ा था। उस समय शिवसेना विभाजित नहीं थी। महाराष्ट्र से शिवसेना के 18 लोकसभा सदस्यों में से 13 मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे में हैं और पांच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में हैं। शिवसेना के प्रवक्ता एवं राज्य के शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि उनकी पार्टी को उम्मीद है कि सीटों के बंटवारे से संबंधित फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं होगा।

भाजपा ने नहीं तय किया अब तक कोई फार्मूला

इस बीच, भाजपा नेता एवं संस्कृति मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि अभी तक कोई फॉर्मूला तैयार नहीं किया गया है। किसी भाजपा नेता ने यह नहीं कहा कि एकनाथ शिंदे की मांगें नहीं मानी जाएंगी। लोगों के हितों की रक्षा के लिए काम करने वाली सरकार देने के उद्देश्य से शिंदे ने भाजपा से हाथ मिलाया था। भाजपा नेता ने कहा, उनकी मांगों का सम्मान किया जाएगा। पहले बालासाहेब ठाकरे और अब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए भाजपा के मन में बहुत सम्मान है। उन्होंने कहा कि शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दोनों एक साथ बैठेंगे और लोकसभा चुनाव तथा विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर फैसला लेंगे।

(भाषा इनपुट के साथ)

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article