परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक मामलों की रोकथाम तथा त्वरित सुनवाई के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) ने एक अहम कदम उठाया है। हाईकोर्ट ने राज्य के चार प्रमुख शहरों-भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में चार विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Special Fast-Track Courts) का गठन किया है। यह अदालतें मुख्य रूप से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (Public Examinations Act, 2024) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज मामलों का त्वरित निस्तारण करेंगी।
चार जिलों में न्यायाधीशों की नियुक्ति
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' (BNSS) की धारा 8(3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों को इन विशेष अदालतों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है:
- भोपाल: प्रवीण पटेल (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश)
- इंदौर: विशाल अखंड (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश)
- ग्वालियर: आनंद कुमार सहलाम (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश)
- जबलपुर: शुभ्रा सिंह (जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश)
क्यों पड़ी फास्ट-ट्रैक कोर्ट की आवश्यकता?
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और फर्जीवाड़े को लेकर युवाओं और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले भू-माफियाओं और गिरोहों पर नकेल कसने तथा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए ये अदालतें गठित की गई हैं।
कड़े कानून के तहत सुनवाई: ये अदालतें नए कानून के तहत मामलों की दिन-प्रतिदिन (day-to-day) सुनवाई करेंगी, जिससे मामलों के वर्षों तक लटके रहने की समस्या खत्म होगी।
