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मानसून से मचा हाहाकार! राजस्थान में सड़कें बनीं तलाब, असम में 103 मौतें, हिमाचल में गर्भवती महिला समेत दो की मौत

मानसून की तेज बारिश ने राजस्थान से लेकर असम, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं सड़कें और सुरंगें पानी में डूब गईं तो कहीं बाढ़ और मकान ढहने जैसी घटनाओं ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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मानसून ने मचाई भारी तबाही (AI फोटो)

Monsoon 2026: मानसून का कहर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में बीते 24 घंटों के दौरान कई जिलों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। चित्तौड़गढ़ के बस्सी में सबसे ज्यादा 227 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि कई अन्य जिलों में भी भारी बारिश हुई। जयपुर समेत प्रमुख शहरों में जलभराव के कारण सड़क यातायात धीमा पड़ा और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। कोटा की मुकंदरा टनल में पानी भरने से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा बंद कर वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजा गया। उधर, असम में बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार के बावजूद दो और मौतों के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 103 हो गई है। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में भारी बारिश के बीच मकान गिरने से गर्भवती महिला समेत दो महिलाओं की जान चली गई, जबकि दो बच्चे घायल हुए। ओडिशा में भी भारी से अत्यधिक भारी बारिश का खतरा बना हुआ है, जिसके चलते बालासोर और भद्रक में रेड अलर्ट तथा आठ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

राजस्थान में 227 मिलीमीटर बारिश दर्ज

राजस्थान में पिछले 24 घंटे के दौरान कई इलाकों में भारी बारिश हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर निचले इलाकों में पानी भर गया जबकि सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित रहा। कई जगह वाहन रेंगते हुए चलते नजर आए, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार, चित्तौड़गढ़ जिले के बस्सी में मंगलवार सुबह से बुधवार सुबह तक सर्वाधिक 227 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारां और उदयपुर में अतिभारी बारिश हुई, जबकि भीलवाड़ा, झालावाड़, करौली, सवाई माधोपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, राजसमंद और नागौर जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश दर्ज की गई। बारिश का असर राजधानी जयपुर समेत कई शहरों में भी देखने को मिला। जयपुर में अजमेरी गेट, चारदीवारी, रेलवे स्टेशन, बाइस गोदाम सर्किल, रामबाग और टोंक फाटक समेत कई इलाकों में तेज बारिश के बाद जलभराव हो गया। इससे यातायात धीमा रहा और कई जगह जाम की स्थिति बन गई। निचले इलाकों के साथ शहर के कई पॉश क्षेत्रों में भी पानी भरने से मोटरसाइकिल और कार सवारों को परेशानी हुई। उधर, कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की मुकंदरा टनल में पानी भरने के कारण इसे दोपहर में यातायात के लिए बंद करना पड़ा। टनल में करीब एक फुट पानी भर गया, जिसे पंपों के जरिए बाहर निकाला जा रहा है। इसके चलते मुंबई की ओर से टनल की तरफ आने वाले वाहनों को एनएच-52 पर डायवर्ट किया गया। कोटा-झालावाड़ एनएच-52 पर दरा की नाल के पास भी जाम लग गया और दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

उदयसागर बांध का जलस्तर 21 फुट से अधिक बढ़ा

उदयपुर में लगातार बारिश के चलते उदयसागर बांध का जलस्तर 21 फुट से अधिक हो गया। बांध की पूर्ण भराव क्षमता 24 फुट है। कैचमेंट क्षेत्र में लगातार बारिश से पानी की आवक बढ़ने के बाद जल संसाधन विभाग ने बुधवार दोपहर बांध के दो गेट एक-एक फुट तक खोल दिए। बांसवाड़ा में बारिश के कारण कई घरों में पानी भर गया। वहीं, जोधपुर में दोपहर बाद चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, शास्त्री नगर, कमला नेहरू नगर और रातानाडा नेहरू पार्क समेत कई इलाकों में बारिश के कारण सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई। हालांकि, बारिश से उमस से परेशान लोगों को कुछ राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। मानसून ट्रफ भी बीकानेर और कम दबाव वाले क्षेत्र से होकर गुजर रही है। इन मौसमी तंत्रों के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। IMD ने बताया कि 13 अगस्त को जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से कहीं-कहीं भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार 14 अगस्त से जोधपुर, उदयपुर और अजमेर संभाग के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। हालांकि, बीकानेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है। 15 अगस्त से राज्य के उत्तरी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की प्रबल संभावना है। विभाग ने जयपुर, दौसा और अजमेर जिलों तथा आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं मध्यम से तीव्र मेघगर्जन के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई है। इसके अलावा हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, कोटपूतली-बहरोड़ और खैरथल-तिजारा समेत कई जिलों में कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में अगले 48 घंटे के दौरान भारी बारिश का अनुमान जताते हुए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

असम में मृतकों की संख्या हुई 103

असम में बुधवार को बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ और चार जिलों में प्रभावित लोगों की संख्या घटकर 87,000 रह गई, लेकिन दो और लोगों की मौत हो जाने के साथ ही मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई। असम आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की ओर से आज शाम जारी किये गये बुलेटिन के अनुसार पिछले 24 घंटे में दो व्यक्तियों की मौत हो गयी। बुलेटिन के मुताबिक शिवसागर और कार्बी आंगलोंग जिलों में बाढ़ के पानी में डूबने से एक-एक व्यक्ति की जान चली गयी। इसी के साथ राज्य में इस साल बाढ़ के कारण अबतक 103 लोगों की मौत हो चुकी है। प्राधिकरण की दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के मुताबिक गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर जिलों में 87000 से अधिक लोग अब भी बाढ़ से बेहाल हैं। गोलाघाट सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ, जहां 42,000 से ज़्यादा बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। नगांव में 20,000 और शिवसागर जिले में 15,000 लोग अब भी मुश्किल स्थिति में हैं। मंगलवार के बाद से बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है; उस समय चार ज़िलों में लगभग 1.13 लाख लोग प्रभावित थे। एएसडीएमए ने बताया कि प्रशासन पांच जिलों में 79 राहत कैंप और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, और अभी 13,011 प्रभावित लोगों की देखभाल कर रहा है। प्राधिकरण ने पिछले 24 घंटों में राज्य के बाढ़ पीड़ितों के बीच 96.55 क्विंटल चावल, 18.26 क्विंटल दाल, 5.41 क्विंटल नमक और 204.81 लीटर सरसों का तेल बांटा है। उसने बताया कि पूरे असम में कुल 433 गांव पानी में डूबे हुए हैं और खेती वाले 10,884.27 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी।

हिमाचल में मकान ढहने से गर्भवती महिला समेत दो की मौत

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बुधवार को भारी बारिश के बीच तीन-मंजिला मकान ढह जाने से आठ महीने की एक गर्भवती समेत दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि दो बच्चे घायल हो गए। राज्य भर में हो रही व्यापक बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। यह हादसा राजगढ़ उपमंडल के छिछड़िया धार गांव में हुआ। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय निवासियों ने बचाव अभियान शुरू किया और मलबे में फंसे चारों लोगों को बाहर निकाला। दोनों महिलाओं को तुरंत राजगढ़ के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। स्थानीय पंचायत प्रधान वेद प्रकाश ठाकुर ने मृतकों की पहचान निर्मला (60) और उनकी बेटी पूजा (32) के रूप में की है। यह मकान निर्मला के पति भीम सिंह का था। आठ महीने की गर्भवती पूजा अपनी डेढ़ साल की बेटी ईरा के साथ मायके आई हुई थी। हादसे के दिन (बुधवार को) ही उसे अपने ससुराल वापस लौटना था। घटना के समय भीम सिंह की बहू भी घर के अंदर मौजूद थी, लेकिन इमारत ढहने से कुछ ही पल पहले वह बाहर निकल आई थी। हालांकि, उनका डेढ़ साल का बेटा अरुण मलबे के नीचे दब गया। महिला ने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों से मदद की गुहार लगाई और बच्चों को बचाने का प्रयास किया। मलबे में दबकर घायल हुए दोनों बच्चों -ईरा और अरुण- राजगढ़ के सरकारी अस्पताल में भर्ती हैं।

209 सड़कें अब भी बंद

राजगढ़ के उपविभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) राजकुमार ठाकुर ने हादसे में दो महिलाओं की मौत और दो बच्चों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रभावित परिवार को फौरी तौर पर राहत राशि मुहैया करा दी गई है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण बुधवार को 209 सड़कें बंद हो गईं और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने 18 अगस्त तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है और कुछ इलाकों में भारी बारिश का ’येलो अलर्ट’ जारी किया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, बुधवार शाम तक पूरे प्रदेश में 209 सड़कें, 70 जल आपूर्ति योजनाएं और 19 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित रहे। सड़कों के बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित मंडी जिला रहा, जहां 94 सड़कें बाधित हुईं। इसके बाद कुल्लू में 60, शिमला में 21, सिरमौर में 11, चंबा में 10, कांगड़ा में पांच और ऊना में चार सड़कें बंद रहीं। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में भी दो-दो सड़कें बंद होने की खबर है। एक से 12 अगस्त के बीच राज्य में सामान्य 116 मिमी की तुलना में 103.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 11 प्रतिशत कम है। अधिकारियों ने बताया कि 30 जून को मानसून के आगमन के बाद से अब तक बारिश से जुड़ी घटनाओं में 75 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 लोग भूस्खलन और एक व्यक्ति अचानक आई बाढ़ की चपेट में आया। मानसून के कारण राज्य को अब तक अनुमानित 911 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। मौसम विभाग ने 18 अगस्त तक राज्य के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी देते हुए येलो अलर्ट जारी किया है।

ओडिशा के इन जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान

मौसम विभाग ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित ओडिशा के बालासोर और भद्रक जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। मौसम विभाग ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से राज्य में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, यह मौसम प्रणाली अगले 24 घंटे में दबाव वाले क्षेत्र में बदल सकती है। दबाव वाला क्षेत्र, कम दबाव वाले क्षेत्र से अधिक शक्तिशाली लेकिन उष्णकटिबंधीय चक्रवात से कम तीव्र मौसम प्रणाली होती है। मौसम प्रणाली की तीव्रता को देखते हुए आईएमडी ने रेड अलर्ट जारी किया है और अधिकारियों को बालासोर तथा भद्रक जिलों में बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक एक या दो स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की स्थिति में ’कार्रवाई करने’ की सलाह दी है। भुवनेश्वर स्थित मौसम केंद्र के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि आईएमडी की शब्दावली में अत्यधिक भारी बारिश का मतलब 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा होना है।

8 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

IMD ने आठ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनमें बाढ़ प्रभावित जाजपुर, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, अंगुल, क्योंझर, मयूरभंज और ढेंकनाल शामिल हैं। इन जिलों में बृहस्पतिवार सुबह तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। भुवनेश्वर मौसम केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने बताया कि बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, क्योंझर, मयूरभंज, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, देवगढ़, अंगुल और जगतसिंहपुर जिलों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी तथा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने अपने विशेष बुलेटिन में कहा कि कम दबाव वाला क्षेत्र अगले 12 घंटे में स्पष्ट रूप से चिह्नित कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल सकता है। इसके बाद अगले 24 घंटे में यह दबाव वाले क्षेत्र में बदलकर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए पश्चिम बंगाल और उससे लगे बांग्लादेश के तटों की ओर जा सकता है। उन्होंने ओडिशा में अगले पांच से छह दिनों तक बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान जताया। IMD ने कहा कि 15 अगस्त तक ओडिशा के तट के पास और उससे दूर तेज हवाएं चलने का अनुमान है, जिसमें हवा की गति 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे होगी और कभी-कभी यह 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने मछुआरों को 15 अगस्त तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने कहा कि 17 अगस्त तक भारी बारिश के अनुमान के चलते नदी के आसपास के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति भी बन सकती है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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