उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में गर्भावस्था के दौरान इलाज या प्रसव के समय सात महीने में 24 महिलाओं की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव और गाजियाबाद के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
NHRC के मुताबिक, इस साल सात महीनों के दौरान जिले के अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में गर्भावस्था के इलाज या प्रसव के दौरान 24 महिलाओं की मौत होने की खबर सामने आई है। इसके अलावा जिले में 3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं की पहचान हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी यानी उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के रूप में की गई है। इन महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान विशेष चिकित्सकीय निगरानी और देखभाल की जरूरत होती है।
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांगा जवाब
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव और गाजियाबाद के जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में महिलाओं की मौत से जुड़े तथ्यों और संबंधित स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति की जानकारी मांगी गई है।
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3000 से ज्यादा हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी, निगरानी पर सवाल
गाजियाबाद में 3,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं को हाई-रिस्क श्रेणी में चिह्नित किए जाने का आंकड़ा भी चिंता का विषय है। ऐसी गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर समय पर बेहतर चिकित्सा केंद्र में रेफर किए जाने की आवश्यकता होती है।
सात महीने में 24 महिलाओं की मौत के सामने आए आंकड़ों के बाद जिले की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, गर्भवती महिलाओं की निगरानी और सरकारी एवं निजी अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब NHRC की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन को इन मौतों के संबंध में विस्तृत जानकारी देनी होगी।
