Delhi Water Crisis: एक तरफ भीषण गर्मी का प्रकोप तो दूसरी ओर राजधानी दिल्ली में पानी की किल्लत। बता दें कि वजीराबाद जलाशय का जलस्तर लगातार कम होने की वजह से कई इलाकों में पानी की दिक्कत बनी हुई है। इस स्थिति का असर राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति पर पड़ रहा है। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक हरियाणा की ओर से पहले से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बावजूद जल संकट की समस्या पूरी तरह दूर नहीं हो पाई है। दिल्ली सरकार ने समर एक्शन प्लान के तहत राजधानी में प्रतिदिन 1002 मिलियन गैलन (एमजीडी) पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया था। हालांकि वर्तमान में सभी जल शोधन संयंत्रों और ट्यूबवेलों के जरिए करीब 902 एमजीडी पेयजल ही सप्लाई हो पा रहा है। यानी तय लक्ष्य की तुलना में दिल्लीवासियों को लगभग 100 एमजीडी कम पानी मिल रहा है।
669 फीट तक पहुंचा जलस्तर
वहीं वजीराबाद जलाशय का सामान्य जलस्तर 674.5 फीट माना जाता है, लेकिन फिलहाल इसका स्तर करीब 669 फीट तक पहुंच गया है। जलस्तर में आई इस गिरावट का असर जल उत्पादन पर भी पड़ रहा है। 134 एमजीडी क्षमता वाले वजीराबाद और 98 एमजीडी क्षमता वाले चंद्रावल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से करीब 30 प्रतिशत कम पेयजल का उत्पादन हो रहा है।
कोंडली में आज भी रहा जल संकट जारी
कोंडली विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में गुरुवार को भी जल संकट जारी रहा और समस्या का समाधान नहीं हो सका। स्थानीय निवासियों के अनुसार पिछले करीब 15 दिनों से क्षेत्र में गंभीर पानी की किल्लत बनी हुई है, जिसके चलते लोगों को पीने का पानी भी खरीदकर लेना पड़ रहा है। पानी की आपूर्ति बाधित होने से परेशान लोगों ने बुधवार को क्षेत्रीय विधायक कुलदीप कुमार से इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को भी जलापूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इस स्थिति से नाराज होकर शुक्रवार को क्षेत्रीय विधायक और स्थानीय लोग दिल्ली सरकार और जल बोर्ड के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
ये इलाके हैं सबसे ज्यादा प्रभावित
जो इलाके इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं उनमें वजीराबाद, आया नगर, आनंद पर्वत, बलजीत नगर, बदरपुर, कोंडली, पालम, महावीर एन्क्लेव, राजधानी एन्क्लेव और तुगलकाबाद शामिल हैं। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हरियाणा सरकार से बातचीत की है, जिसके बाद हरियाणा की ओर से कैरियर लाइन नहर (सीएलसी) और दिल्ली उप-शाखा (डीएसबी) के जरिए लगभग 979.5 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे पहले करीब 900 क्यूसेक पानी की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि पानी की मात्रा बढ़ने के बावजूद फिलहाल समस्या का तत्काल समाधान नहीं हो सका है, क्योंकि इस पानी को दोनों जल शोधन संयंत्रों तक पहुंचने में अभी लगभग दो दिन का समय लगेगा।
यमुना में पर्याप्त मात्रा में पानी का प्रवाह जरूरी
वजीराबाद जलाशय का जलस्तर बढ़ाने के लिए यमुना में पर्याप्त मात्रा में पानी का प्रवाह जरूरी है। वर्तमान में दो प्रमुख जल शोधन संयंत्र (Water Treatment Plant) पूरी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उत्तरी, पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बनी हुई है। कई जगहों पर पानी पूरी तरह बंद है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बेहद कम आपूर्ति हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे सिविल लाइंस, मॉडल टाउन, हिंदू राव अस्पताल क्षेत्र, कमला नगर, शक्ति नगर, करोलबाग, पहाड़गंज, एनडीएमसी क्षेत्र और दिल्ली छावनी सहित आसपास के इलाकों के लोग भी कई दिनों से पानी की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं।
