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दिल्ली की हवा साफ करने के लिए 'स्मॉग-ईटिंग' तकनीक पर बड़ा अध्ययन शुरू, IIT मद्रास के साथ MoU

यह पहल मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व में शुरू की गई है। इस समझौते के तहत वैज्ञानिक यह जांच करेंगे कि टाइटेनियम डाइऑक्साइड आधारित फोटोकेटलिटिक मटेरियल्स का इस्तेमाल करके हवा में मौजूद प्रदूषकों को कितना कम किया जा सकता है।

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प्रतीकात्मक फोटो

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक नई वैज्ञानिक पहल शुरू की है। सरकार ने ‘स्मॉग-ईटिंग’ तकनीक पर अध्ययन करने के लिए IIT Madras के साथ समझौता (MoU) किया है। इस तकनीक के जरिए सड़कों, इमारतों और शहर की अन्य सतहों पर ऐसी खास कोटिंग लगाई जा सकती है, जो हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों को कम करने में मदद करेगी।

यह पहल मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व में शुरू की गई है। इस समझौते के तहत वैज्ञानिक यह जांच करेंगे कि टाइटेनियम डाइऑक्साइड आधारित फोटोकेटलिटिक मटेरियल्स का इस्तेमाल करके हवा में मौजूद प्रदूषकों को कितना कम किया जा सकता है।

'...तो इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है'

पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने बताया कि इस अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सड़कों, इमारतों, फुटपाथों और अन्य सतहों पर ‘स्मॉग-ईटिंग’ कोटिंग्स लगाने के सबसे प्रभावी और किफायती तरीके क्या हो सकते हैं। अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।

इस अध्ययन की शुरुआत सबसे पहले लैब टेस्टिंग से होगी। आईआईटी मद्रास में बने विशेष स्मॉग चैम्बर में इन मटेरियल्स का परीक्षण किया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि वे प्रदूषण को कितना कम कर सकते हैं। इसके बाद दिल्ली में वास्तविक परिस्थितियों में फील्ड ट्रायल किए जाएंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार, टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे फोटोकेटलिटिक मटेरियल्स धूप के संपर्क में आने पर सक्रिय हो जाते हैं और हवा में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) तथा अन्य हानिकारक गैसों को कम हानिकारक तत्वों में बदल देते हैं।

छह महीने तक चलने वाले इस अध्ययन में यह भी देखा जाएगा कि इन मटेरियल्स को शहर के ढांचे में किस तरह शामिल किया जा सकता है। जैसे इन्हें कंक्रीट और डामर में मिलाकर, इमारतों पर कोटिंग के रूप में या स्ट्रीट लाइट और छतों पर लगाए जाने वाले पैनलों के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह पहल शहर की हवा को साफ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा

सरकार का कहना है कि अगर अध्ययन के नतीजे सकारात्मक आते हैं, तो इस साल सर्दियों में जब दिल्ली में स्मॉग का स्तर बढ़ता है, तब इन तकनीकों का बड़े स्तर पर उपयोग करने की संभावना भी देखी जाएगी। दिल्ली सरकार के अनुसार, यह पहल शहर की हवा को साफ करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें रोड डस्ट कंट्रोल और अन्य उपाय भी शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों की मदद से राजधानी की हवा को साफ और सुरक्षित बनाना है।

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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