Maharashtra Weather Update: महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से जारी बेमौसम बारिश के दौर ने जहां शहरों में रहने वाले लोगों को चिलचिलाती गर्मी से अस्थायी राहत दी, वहीं ग्रामीण अंचलों में यह कुदरत का कहर बनकर टूटी। इस बेमौसम बरसात ने आम, प्याज और अंगूर जैसी कीमती फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। अब जबकि बारिश का यह सिलसिला थमने की ओर है, मौसम विभाग ने राज्य के लिए नई और गंभीर चेतावनी जारी की है।
भीषण गर्मी और लू की आहट (Heatwave Alert Maharashtra)
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, राज्य में बेमौसम बारिश के विदा होते ही अब भीषण गर्मी और लू (Heatwave) का नया दौर शुरू होने वाला है। अगले 48 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में तापमान में तेजी से उछाल आने की संभावना है। मुंबई सहित कोंकण के तटीय इलाकों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिससे वहां गर्म और उमस भरा मौसम लोगों की मुश्किलें बढ़ाएगा। विदर्भ में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, जहां पारा 41 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। पुणे और सोलापुर जैसे मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों में भी मौसम शुष्क रहेगा और तापमान 32 से 38 डिग्री के बीच बना रहेगा।
यहां अब भी बारिश की संभावना (IMD Rain Alert Maharashtra )
भले ही राज्य के अधिकांश हिस्सों में धूप तेज होने वाली है, लेकिन दक्षिण महाराष्ट्र और मराठवाड़ा के कुछ इलाकों में अब भी बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। आज, 9 अप्रैल को सांगली, सोलापुर, धाराशिव और लातूर जिलों में छिटपुट स्थानों पर बिजली गिरने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ से लेकर मन्नार की खाड़ी तक बने निम्न दबाव के क्षेत्र की वजह से इन क्षेत्रों में मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। राज्य में फिलहाल आंशिक रूप से बादल छाए रहने के कारण दोपहर में धूप चुभ रही है, जबकि शाम के समय हल्की ठंडक महसूस की जा रही है।
अल नीनो का साया (Monsoon 2026 Maharashtra)
किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता की खबर मानसून को लेकर आ रही है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मानसून की बारिश औसत से कम रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण प्रशांत महासागर में सक्रिय होने वाली 'अल नीनो' की घटना को माना जा रहा है। अल नीनो के कारण जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश प्रभावित हो सकती है, जिससे देश भर में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की 30 प्रतिशत संभावना जताई गई है। हालांकि, हिंद महासागर में 'इंडियन ओशन डाइपोल' (IOD) की अनुकूल स्थिति इस प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन अगस्त और सितंबर के महीनों में बारिश की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
मध्य और पश्चिमी भारत पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर (Monsoon 2026 Update)
स्काईमेट के अध्ययन के अनुसार, अल नीनो का सबसे प्रतिकूल प्रभाव मध्य और पश्चिमी भारत पर पड़ने की आशंका है, जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है। राज्य में आमतौर पर जुलाई और अगस्त में सबसे अधिक वर्षा होती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण इस बार फसल चक्र प्रभावित हो सकता है। जहां पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अच्छी बारिश की उम्मीद है, वहीं महाराष्ट्र के किसानों को कम बारिश के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक मानसून रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस सप्ताह जारी होने की उम्मीद है।
क्या है अल नीनो? (What is El Nino in Hindi)
अल नीनो (El Nino) एक मौसमी घटना है जो प्रशांत महासागर के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण होती है। सामान्य परिस्थितियों में प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्से का पानी गर्म रहता है, लेकिन अल नीनो के दौरान समुद्र की सतह का यह तापमान पूर्व की ओर यानी दक्षिण अमेरिका के तट की तरफ बढ़ने लगता है। इस बदलाव का सीधा असर वैश्विक हवाओं और बारिश के चक्र पर पड़ता है। भारत के संदर्भ में, अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून और सूखे जैसी स्थिति का जिम्मेदार माना जाता है, क्योंकि यह मानसून की हवाओं को धीमा कर देता है जिससे देश के कई हिस्सों में बारिश औसत से कम होती है। यह घटना केवल खेती-किसानी को ही नहीं, बल्कि वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी कर पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित करती है।
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