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Lucknow News: ऑफ सीजन में लखनऊ में खिले ट्यूलिप फूल, इसकी खेती बनेगी शहर के लिए वरदान

Lucknow News: एनबीआरआई बंथरा अनुसंधान केंद्र, लखनऊ में ऑफ सीजन ट्यूलिप फूलों का खिलना किसी वरदान से कम नहीं होगा। ये किसानों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करेगा।

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लखनऊ में ऑफ सीजन खिले ट्यूलिप के फूल

Photo : iStock

Lucknow News: ट्यूलिप एक खूबसूरत पुष्प है। इसकी खूबसूरती को देखने के लिए लोग कश्मीर और हॉलैंड तक की यात्रा कर लेते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत में ट्यूलिप केवल कश्मीर में ही देखने को मिलेगा। कई अन्य राज्य और शहर भी हैं, जहां इन्हें उगाया जाता है। ये बहुत आकर्षक होते हैं। बता दें कि लखनऊ में भी इन पुष्पों को खिलते हुए पहली बार देखा गया है। लखनऊ के राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान बंथरा स्टेशन के बगीचे में ट्यूलिप फूल खिल उठे हैं। जानकारी के अनुसार, ट्यूलिप मार्च और अप्रैल के महीने खिलते हैं, लेकिन लखनऊ में इन्हें दिसंबर के महीने में खिलते हुए देखा गया है। ऑफ-सीजन में फूलों को खिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

एनबीआरआई के बगीचे में खिले ट्यूलिप फूल

एनबीआरआई अनुसंधान केंद्र के बगीचे में दिसंबर के महीने में करीब 60 ट्यूलिप फूल खिले हैं। इतना ही नहीं वनस्पति शास्त्रियों की मानें तो हो सकता है कि सर्दियों के महीने में खिलने वाला ये ट्यूलिप दुनिया में खिलने वाला पहला ट्यूलिप हो। बता दें कि इस खिलने वाले इन ट्यूलिप फूलों के पीछे तीन एनबीआरआई वैज्ञानिक है। जिनका नाम क्रमशः संस्थान के निदेशक अजीत कुमार शासनी, उद्यान प्रभारी-सह-मुख्य वैज्ञानिक एसके तिवारी, और प्रमुख वैज्ञानिक राकेश चंद्र नैनवाल है। उनके द्वारा अक्टूबर से ही ट्यूलिप बल्बों के पोषण के लिए कड़ी मेहनत की गई थी। उन्होंने फूल और मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए बहुत मेहनत की थी।

इन वैज्ञानिकों ने बताया कि अक्टूबर में ट्यूलिप फूल की यात्रा शुरू की गई थी। इसे अधिक चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए उन्होंने एनबीआरआई बंथरा का अनुसंधान स्टेशन चुना और फूल को उगाने का कार्य शुरू किया। एसके तिवारी बताते हैं कि उन्होंने लाल, पीले, नारंगी, सफेद और गुलाबी पांच रंग के ट्यूलिप फूल लगाए थे, जो अब खिलना शुरू हो गए हैं।

ट्यूलिप के लिए तापमान सबसे महत्वपूर्ण

इन वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए बताया कि ट्यूलिप के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण तापमान होता है। इस फूल को तीन चरणों में अगल-अलग तापमान की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 15 से 18 डिग्री, दूसरे चरण में 2 से 10 डिग्री और तीसरे यानी अंतिम चरण में 15 से 20 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है। तापमान में जरी सी भी कमी से इस फूल को उगाने में परेशानी हो सकती है। ऑफ-सीजन ट्यूलिप फूलों का खिलना सजावटी फसलों के प्रयासों के लिए एनबीआरआई के लिए एक नया अध्याय है।

ट्यूलिप फूलों की खेती लखनऊ के लिए वरदान

ट्यूलिप एक जीवंत और सजावटी फूल है। किसी को देने के साथ ये घर की सजावट के लिए बहुत आकर्षक माना जाता है। लेकिन ये भी बता दें कि ये फूल नाजूक भी बहुत होता है। इसे उगाने और खिलने के लिए ठंडा तापमान और अच्छी जल निकास वाली मिट्टी की आवश्यकता होती है। इन सभी बातों का ध्यान देते हुए इसे ऑफ सीजन में उगाया गया था। एनबीआरआई के निदेशक अजीत कुमार ने इस संदर्भ में बात करते हुए जानकारी दी की ऑफ-सीजन में ट्यूलिप का खिलना बंथरा अनुसंधान केंद्र की सफलता और उनके यहां के वैज्ञानिकों के समर्पण और विशेषज्ञता का प्रमाण है। उन्होंने आगे लखनऊ में ट्यूलिप की खेती को वरदान बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जलवायु के अनुकूल नई ट्यूलिप किस्मों के विकास को बढ़ावा मिलेगा। इतना ही नहीं ट्यूलिप की खेती किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा करेगी।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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