लखनऊ

भारी बारिश के बाद यूपी विधानसभा में भरा पानी, चाचा शिवपाल ने यूं लिए सरकार के मजे

Waterlogging in UP Assembly: समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने विधानसभा के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में पानी भरने का वीडियो भी शेयर किया है। उन्होंने लिखा, बजट की सबसे अधिक आवश्यकता उत्तर प्रदेश विधानसभा को है, एक मूसलाधार बारिश में यह हाल है तो बाकी प्रदेश भगवान भरोसे है।

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यूपी विधानसभा में जलभराव पर शिवपाल सिंह यादव का तंज।

Waterlogging in UP Assembly: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया है। हजरतगंज से लेकर गोमती नगर जैसे पॉश इलाके की सड़कें डबाडब हैं। यहां तक कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी पानी भर गया है, जिससे विधायकों को आने-जाने में परेशानी हुई। विधानसभा में यह जलभराव बजट सत्र के दौरान हुआ, जिसके बाद समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने सरकार के मजे ले लिए।

शिवपाल यादव ने विधानसभा के ग्राउंड फ्लोर और बेसमेंट में पानी भरने का वीडियो भी शेयर किया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर उन्होंने लिखा, बजट की सबसे अधिक आवश्यकता उत्तर प्रदेश विधानसभा को है, एक मूसलाधार बारिश में यह हाल है तो बाकी प्रदेश भगवान भरोसे है। दरअसल, विधानसभा में जलभराव तब हुआ जब अनुपूरक बजट पर चर्चा चल रही थी।

सीएम योगी को भी बदलना पड़ा रास्ता

राजधानी लखनऊ में दो घंटे से लगातार तेज बारिश के कारण कई जगह जलभराव हुआ। विधानसभा के साथ ही नगर निगम दफ्तर में भी पानी भर गया। यहां तक कि लोगों को भारी बारिश के कारण दिन में गाड़ियों की लाइट जलानी पड़ गई। वहीं, विधानसभा के गेट नंबर 7 पर काफी जलभराव हो गया, जिसके बाद गेट नंबर 1 से सीएम योगी की फ्लीट को बाहर निकाला गया।

हजरतगंज बन गया तालाब

इसी तरह लखनऊ के मुख्य चौराहा हजरतगंज भारी बारिश के कारण तालाब बन गया। हजरतगंज चौराहे पर भारी जलभराव हो गया। लोगों ने कहा कि हजरतगंज चौराहे पर जलभराव नगर निगम के दावे की पोल खोल रहा है। राजधानी में सीवर सफाई नहीं होने का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। अगर सीवर की सफाई जिम्मदारों ने कराई होती तो अव्यवस्था देखने को नहीं मिलती। वहीं, मौसम विभाग ने भारी वर्षा के मद्देनजर लोगों से अनावश्यक घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। विभाग ने एडवाइजरी में कहा है कि असुरक्षित भवनों और पेड़ों के संपर्क में आने से बचें। लोगों से घरों में ही रहने की अपील की गई है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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