लखनऊ

शाइस्ता के लिए नहीं कम हो रहा BSP का प्यार, निकाय चुनाव से पहले बीएसपी विधायक ने दिए बड़े संकेत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 24, 2023, 07:48 AM IST

Shaista Parveen: बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने कहा है कि फरार चल रहीं शाइस्ता परवीन अभी भी बीएसपी का हिस्सा हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ कोई भी ऐसा सबूत पेश नहीं किया है, जिससे उमेश पाल हत्याकांड में उनकी संलिप्तता साबित हो सके।

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शाइस्ता परवीन

Photo : PTI

Shaista Parveen: उमेश पाल हत्याकांड के बाद से फरार चल रही अतीक की पत्नी शाइस्ता को भले ही बहुजन समाज पार्टी (BSP)ने टिकट न दिया हो, लेकिन पार्टी नेताओं का प्यार उसके लिए कम नहीं हो रहा है। पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह ने कहा है कि शाइस्ता अभी भी पार्टी का हिस्सा हैं और पुलिस ने अभी तक कोई ऐसा सबूत नहीं पेश किया है, जिससे यह साबित हो कि उमेश पाल हत्याकांड में उनकी संलिप्तता थी।

बता दें, उमेश पाल हत्याकांड से कुछ महीने पहले ही शाइस्ता बीएसपी में शामिल हुई थीं। उन्हें पार्टी की ओर से प्रयागराज मेयर का टिकट भी दिया गया था। हालांकि, उमेश पाल हत्याकांड में नामजद होने के बाद बसपा सुप्रीमो ने शाइस्ता का टिकट काट दिया। मायावती ने साफ कहा था कि पार्टी न ही शाइस्ता और न उनके परिवार के किसी व्यक्ति को मेयर का टिकट देने जा रही है।

क्या शाइस्ता के इशारे पर मिला सईद अहमद को टिकट

बता दें, शाइस्ता का टिकट काटकर बीएसपी ने यहां से सईद अहमद को मेयर का टिकट दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सईद अहमद को शाइस्ता के इशारे पर ही टिकट दिया गया। इस पर बसपा विधायक ने कहा कि उमेश पाल हत्याकांड में फरार होने के बाद से पार्टी का शाइस्ता से कोई संपर्क नहीं है। पार्टी ने अपने नेताओं से तय करके सईद अहमद को प्रत्याशी बनाया है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि पार्टी और खुद अतीक अहमद चाहता था शाइस्ता प्रयागराज से मेयर का चुनाव लड़ें। उन्होंने कहा, पार्टी ने अभी तक शाइस्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। वह अभी भी बसपा का हिस्सा हैं।

उमेश पाल हत्याकांड में हैं नामजद

शाइस्ता परवनी उमेश पाल हत्याकांड में नामजद हैं। उमेश पाल के परिजनों ने शाइस्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना के बाद से शाइस्ता फरार चल रही हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। शाइस्ता पर पहले 25 हजार रुपये का इनाम रखा गया था, जिसे बढ़ाकर 50 हजार कर दिया गया। अतीक की हत्या के बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि शाइस्ता सरेंडर कर सकती है, लेकिन अभी तक उसने ऐसा नहीं किया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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