लखनऊ

हेट स्पीच मामले में आजम खान को दो साल की सजा, 2500 रुपये का जुर्माना भी लगा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 15, 2023, 02:52 PM IST

Azam Khan: 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान हेट स्पीच मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने सपा नेता को दो साल की सुनाई है, साथ ही उन पर 2500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

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आजम खान को सजा

Azam Khan: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को एक बार फिर से करारा झटका लगा है। हेट स्पीच मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने सपा नेता को दो साल की सुनाई है, साथ ही उन पर 2500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

बता दें, 2019 में आजम खान पर लोकसभा चुनाव के दौरान शहजाद नगर थाना क्षेत्र के धमोरा में हेट स्पीच का केस दर्ज किया गया था। उनके खिलाफ आठ अप्रैल को मामला दर्ज हुआ था। आरोप है कि आज खान ने आजम खान ने अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रामपुर डीएम और चुनाव आयोग पर निशाना साधा था। इस दौरान उन्होंने भड़काऊ भाषण देते हुए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

आजम खान की जा चुकी है विधानसभा सदस्यता

बता दें, इससे पहले हेट स्पीच के एक मामले में आजम खान को दोषी करार दिया गया था। कोर्ट ने तीन साल की सजा का ऐलान किया था, जिसके बाद आजम खान की विधानसभा सदस्यता चली गई थी। इसके बाद रामपुर में उपचुनाव कराए गए थे, जिसमें भाजपा ने जीता हासिल की थी। बता दें, रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले को आजम खाने ने जिला न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके बाद इसी साल मई में अदालत ने एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था।

आजम की सुरक्षा हुई वापस

बता दें, गुरुवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने आजम खान की वाई श्रेणी की सुरक्षा को वापस ले लिया था, जिसके बाद समाजवादी पार्टी ने इसे मुद्दा बनाया था। हालांकि, अपने आदेश के 24 घंटे बाद ही उत्तर प्रदेश शासन ने आजम खान की सुरक्षा वापस कर दी थी। सरकार ने पहले अपने फैसले में कहा था कि आजम खान को अब सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, रामपुर जिलाधिकारी और एसपी की सिफारिश पर उन्हें सुरक्षा वापस की गई।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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