लखनऊ

संत प्रेमानंद के प्रति दीवानगी, साइकिल से 400 किलोमीटर का सफर: बच्चे ने टाइम्स नाउ नवभारत पर बयां की पूरी कहानी

सातवीं क्लास में पढ़नेवाला बच्चा जेब में सिर्फ 100 रुपए रखकर बुलंद हौसले के साथ साइकिल पर वृंदावन का सफर तय करता है और वह भी 400 किलोमीटर का। टाइम्स नाउ नवभारत के संवाददाता विनोद मिश्रा ने उस बच्चे के परिवार के साथ मिलकर जाना कि आखिर बच्चे में वृंदावन के संत प्रेमानंद के प्रति इतनी दीवानगी आखिर क्यों है?

लखनऊ: एक दिन पहले ये खबर चर्चा में बनी कि कि एक 7वी क्लास का बच्चा 400 किलोमीटर साइकिल से सफर तय कर प्रेमानंद जी से मिलने वृंदावन पहुंच गया। अब उस बच्चे के घर जाकर टाइम्स नाउ नवभारत के संवाददाता विनोद मिश्रा ने उससे बातचीत की। फिर पता चला कि आखिर वो बच्चा संत प्रेमानंद के प्रति इतनी दीवानगी क्यों रखता है। और आखिर उसने वृंदावन साइकिल से जाने का फैसला क्यों किया।

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता सिर्फ बड़ों के बीच ही ही नहीं रह गई है उनसे मिलने की इच्छा अब बच्चों में भी देखने को मिल रही है। ऐसा ही एक मामला राजधानी लखनऊ के पारा इलाके का सामने आया है। जहां पर 7वीं की कक्षा के छात्र वीर ठाकुर ने प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए अपनी साइकिल से 400 किलोमीटर का सफर तय किया और वृंदावन पहुंच गया।

यूपी की राजधानी लखनऊ के पारा इलाके के पिंक सिटी बुद्धेश्वर निवासी धीरज वर्मा सोनी सर्राफा की धनिया मेरी पुल के पास दुकान है। इनका बेटा पारा के एक स्कूल में 7वीं का छात्र है। छात्र ने अपनी मां से 100 रुपए किताब के लिए मांगे थे, जिसके बाद किताब लेने की बात कहकर वह घर से निकला और सीधे वृंदावन की तरफ निकल पड़ा।

इसी साइकिल पर विराट वृंदावन पहुंचा था

इसी साइकिल पर विराट वृंदावन पहुंचा था

तस्वीर में जिस रेंजर साइकिल को देख रहे हैं ये वहीं रेंजर साइकिल है और इसी पर वह छात्र सवार हो गया । फिर वो आगरा एक्सप्रेस-वे की ओर निकल पड़ा। परिवार वाले बेटे को ढूंढने में परेशान हुए इसके बाद परिजनों ने पारा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने सीसीटीवी खंगालना शुरू किया तो करीब 100 किलोमीटर दूर सीसीटीवी कैमरे देखने के बाद यह जानकारी हो पाई की छात्र वृंदावन साइकिल पर गया है। पुलिस ने छात्र को वृंदावन से बरामद कर लिया है और उसके माता-पिता को सौंप दिया।

बेटे की मां आरती सोनी ने बताया बेटे ने निकलने से पहले मोबाइल में वृंदावन की एक बार दूरी देखी थी और वह कई बार वृंदावन के गोकुल आश्रम में एडमिशन के लिए कहता रहता था। पहले हमको लगता था बेटा मजाक कर रहा है, लेकिन उसकी दीवानगी देख कर हम सभी लोग हैरान हो गए हैं। इस साल उसकी पढ़ाई पूरी होने के बाद वृंदावन के गोकुल आश्रम में एडमिशन का प्रयास जरूर करेंगे।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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