Lucknow Fire Tragedy: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच आगे बढ़ने के साथ ही हादसे के कारणों को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रखे एक फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट होने से आग लगी थी। वहीं बायोमेट्रिक गेट न खुलने और छत तक जाने का रास्ता बंद होने से कई लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। जिससे यह घटना भीषण त्रासदी में बदल गई। अब जांच एजेंसियां तकनीकी खामियों और सुरक्षा मानकों में लापरवाही के एंगल से पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।
फ्रीजर से उठी चिंगारी ने मचाई तबाही
इमारत में लगी भयावह आग को लेकर अब विद्युत सुरक्षा निदेशालय ने भी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, फ्रीजर में आई खराबी के बाद आग भड़की और इसकी लपटें तेजी से फैल गई। आग के कारण फ्रीजर के ऊपर लगा एसी डक्ट भी इसकी चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि एसी का कंप्रेसर फटने से पूरे फ्लोर में भयंकर धुआं भर गया, जिससे अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। धुएं और आग के चलते कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए।
गेमिंग सेंटर के बच्चों को नहीं मिला बचने का रास्ता
जांच में यह भी पता चला है कि बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर संचालित हेड एंड हॉपर्स एनीमेशन एंड गेमिंग जोन में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कमजोर थी। यहां का मेन गेट और निकास द्वार (Exit Gate) थम्ब इम्प्रेशन सिस्टम से खुलता था। हादसे के समय यह सिस्टम काम नहीं किया, जिससे गेट न खुलने के कारण अंदर मौजूद लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके। घटना के समय इमारत की छत पर जाने वाला गेट भी बंद था। ऐसे में कई छात्र और कर्मचारी ऊपर जाकर अपनी जान बचाने का रास्ता भी नहीं खोज सके। जांच एजेंसियां अब जांच कर रही हैं कि इमारत में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और बिजली व्यवस्था की भी गहनता से जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में सोमवार को भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए। हादसे के बाद पुलिस ने इमारत मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनमें रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल है। पुलिस और प्रशासन मामले की गहन जांच कर रहे हैं।
