शहर

LPG Crisis: दिल्ली में अटल कैंटीन में बढ़ी भोजन चाहने वालों की भीड़

घरों में द्रवित पेट्रोलियम गैस सिलेंडर खत्म होने के कारण लोग रोजाना भोजन प्राप्त करने के लिए अटल कैंटीन जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इन रियायती सुविधाओं पर अचानक निर्भरता बढ़ गई है।

Image

दिल्ली में अटल कैंटीन (फाइल फोटो)

पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव में वृद्धि के बाद दिल्ली के निवासियों में रसोई गैस के घटते भंडार को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं, जिसके चलते राजधानी में अटल कैंटीनों में पहुंचने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।घरों में द्रवित पेट्रोलियम गैस सिलेंडर खत्म होने के कारण लोग रोजाना भोजन प्राप्त करने के लिए अटल कैंटीन जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप इन रियायती सुविधाओं पर अचानक निर्भरता बढ़ गई है। कैंटीनों के बाहर लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे कई बार खाद्य पदार्थ खत्म हो जाते हैं।

आश्रम की निवासी आभा शेखर ने कहा, 'मंगलवार से मेरा परिवार दोपहर और रात के खाने के लिए यहीं (अटल कैंटीन में) आ रहा है। यह हमारे घर के पास है, इसलिए काम चल जाता है। वरना मेरे पास खाना बनाने का कोई और विकल्प नहीं है।' शेखर ने बताया कि वह घरेलू सहायिका का काम करती है और उनके पति निर्माण मजदूर हैं।

यह दंपति रोजाना सिलेंडर वितरकों के पास जा रहा है, लेकिन उसे अभी तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है।आश्रम में अटल कैंटीन के पास राशन की दुकान चलाने वाले हेमंत ने कहा कि उसने भी हाल के दिनों में अपने घर पर उपलब्ध गैस को बचाने के लिए कैंटीन में ही खाना शुरू कर दिया है।

'तब तक उसकी कैंटीन पर निर्भर रहने की योजना'

हेमंत ने बताया कि उसने लगभग 20 दिन पहले अपना गैस सिलेंडर भरवाया था और यह शायद कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा। उसने कहा कि जब तक उसे दूसरा सिलेंडर नहीं मिल जाता, तब तक उसकी कैंटीन पर निर्भर रहने की योजना है, क्योंकि वहां का खाना किफायती है।कैंटीन के एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों में सामान्य से अधिक लोग कैंटीन में आ रहे हैं और अचानक आई भीड़ के कारण कई बार भोजन की उपलब्धता प्रभावित हुई है।

'सामान्यतः एक दिन में लगभग 200 से 250 लोग कैंटीन आते हैं'

उन्होंने कहा, 'कल रात खाने के लिए लोगों की लाइन सड़क तक पहुंच गई थी। खाना खत्म हो गया और कुछ लोगों को बिना खाए ही वापस जाना पड़ा।' एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि सामान्यतः एक दिन में लगभग 200 से 250 लोग कैंटीन आते हैं। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह के आरंभ से यह संख्या बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के प्रधान निदेशक पी.के. झा ने कहा कि सिलेंडरों से संबंधित कोई समस्या नहीं है। उन्होंने अटल कैंटीनों या आश्रय गृहों में भोजन की कमी से इनकार किया।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article