कोलकाता

कोलकाता चिड़ियाघर में दो बाघिनों की मौत, बंगाल CWLW ने दिए जांच के आदेश

पश्चिम बंगाल के मुख्य वन्यजीव वार्डन (सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) ने दक्षिण कोलकाता के अलीपुर स्थित प्रतिष्ठित प्राणी उद्यान में दो वयस्क बाघिनों की मौत की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। दोनों बाघिनों की मौत मंगलवार और बुधवार की रात महज 24 घंटों में हुई।

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कोलकाता चिड़ियाघर में दो बाघिनों की मौत (PHOTO-PTI)

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्य वन्यजीव वार्डन (सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) ने दक्षिण कोलकाता के अलीपुर स्थित प्रतिष्ठित प्राणी उद्यान में दो वयस्क बाघिनों की मौत की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। दोनों बाघिनों की मौत मंगलवार और बुधवार की रात महज 24 घंटों में हुई।

हालांकि राज्य वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि दोनों बाघिनों की मौत उनकी बढ़ती उम्र के कारण हुई, लेकिन दोनों मौतों के बीच इतने कम अंतराल को लेकर संदेह जताया जा रहा है। कई वन्यजीव प्रेमी इसे अप्राकृतिक मौत मान रहे हैं। इस मुद्दे पर उठे विवाद को देखते हुए, पश्चिम बंगाल के वन्यजीव कल्याण विभाग ने मामले की विस्तृत जांच और एक अलग समिति के गठन का आदेश दिया है।

मृत दोनों बाघिनें 'पायल' और 'रूपा' हैं। इनमें से रूपा एक एल्बिनो बाघिन थी। सबसे पहले मंगलवार रात को पायल की मौत हुई, जबकि रूपा की बुधवार रात को। रूपा 21 वर्ष की और पायल 17 वर्ष की थी। राज्य वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "बाघिनों के शवों को उनकी मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। विसरा परीक्षण भी किया जाएगा।"

पायल को 2016 में ओडिशा के नंदनकानन से अलीपुर चिड़ियाघर लाया गया था। चिड़ियाघर के एक जानकार ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से वह उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थी और उसका खान-पान अनियमित हो गया था। प्राणि उद्यान के एक सूत्र ने बताया, "उस समय उसकी अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी जांच हुई और फिर कुछ समय तक उसका इलाज चला। उस पर इलाज का असर भी होने लगा था। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में उसकी हालत बिगड़ने लगी और आखिरकार मंगलवार को उसकी मौत हो गई।"

दूसरी ओर, अल्बिनो बाघिन रूपा का जन्म अलीपुर चिड़ियाघर में ही हुआ था। उसकी मां 'कृष्णा' और पिता 'अनिर्बान' थे, जो एक अल्बिनो बाघ था। प्राणि उद्यान के एक सूत्र ने बताया, "वह भी उम्र संबंधी बीमारियों से भी पीड़ित थी, कुछ महीने पहले उसका एक पैर लकवाग्रस्त हो गया था।"

अलीपुर चिड़ियाघर पिछले कुछ महीनों से दो कारणों से विवादों में रहा है।

पहला कारण वहां से जानवरों के गायब होने के आरोप थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर से रातोंरात 321 जानवर गायब हो गए थे। दूसरा विवाद उन आरोपों को लेकर था कि पश्चिम बंगाल सरकार अलीपुर चिड़ियाघर की जमीन को अवैध रूप से निजी उद्यमियों को औने-पौने दामों पर बेचने की कोशिश कर रही है। इसी महीने, कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि अगले अदालती आदेश तक इस प्राणि उद्यान की भूमि का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता।

पश्चिम बंगाल सरकार पर अलीपुर चिड़ियाघर की जमीन को अवैध रूप से बेचने का आरोप सबसे पहले राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के उस प्रमुख स्थान को औने पौने दाम पर बेचने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।

(आईएएनएस इनपुट )

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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