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महाभारत काल से लेकर प्रसिद्ध लड़ाइयों तक, जानें क्या है 'पानीपत' का दिलचस्प इतिहास

Panipat History: पानीपत भारत का वह ऐतिहासिक नगर है, जिसने पौराणिक काल से लेकर आधुनिक इतिहास तक अनेक निर्णायक घटनाओं को जन्म दिया। महाभारत के पांडव-युग से जुड़ा यह शहर तीन प्रसिद्ध युद्धों का प्रमुख केंद्र रहा है। आज भी यहां स्थित स्मारक, संग्रहालय और प्राचीन स्थल इस गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं। तो आइए जानें इनके बारे में।

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पानीपत शहर का इतिहास

Panipat History: पानीपत उत्तर भारत का एक प्राचीन और ऐतिहासिक नगर है, जिसका परिचय महाभारतकालीन संदर्भों में भी मिलता है। माना जाता है कि पांडवों द्वारा स्थापित पांच नगरों में से एक पाण्डुप्रस्थ ही बाद में पानीपत के नाम से प्रसिद्ध हुआ। महाभारत में जब पांडव-कौरव विवाद चरम पर पहुंचा, तब युधिष्ठिर ने दुर्योधन से जिन पांच गांवों की मांग की थी, उनमें पानीपत भी शामिल था। इसी कारण यह क्षेत्र प्राचीन इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

Panipat and Mahabharat Connection

पानीपत और महाभारत का कनेक्शन

आधुनिक काल के इतिहास में भी पानीपत का विशेष महत्व है, क्योंकि यहीं तीन निर्णायक युद्ध लड़े गए, जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। पहला युद्ध 1526 में बाबर और दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के बीच हुआ, जिसमें बाबर ने लोदी की विशाल सेना को पराजित कर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। दूसरा युद्ध 1556 में मुगल शासन और अफगान शासक आदिलशाह के सेनापति हेमू के बीच लड़ा गया, जिसमें अकबर की सेना विजयी रही। तीसरा युद्ध 1761 में अहमदशाह दुर्रानी और मराठा पेशवा की सेना के बीच हुआ, जिसमें मराठों को भारी हार का सामना करना पड़ा। इस प्रकार पानीपत न केवल पौराणिक काल से महत्व रखता है, बल्कि भारतीय इतिहास के निर्णायक मोड़ों का भी साक्षी रहा है।

पानीपत में क्या है खास?

पानीपत संग्रहालय

हरियाणा सरकार द्वारा स्थापित बैटल ऑफपानीपत मेमोरियल सोसाइटी ने उन ऐतिहासिक घटनाओं को संरक्षित और प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष संग्रहालय बनाया है, जिनका संबंध पानीपत में लड़ी गई तीन प्रमुख लड़ाइयों से है। इस संग्रहालय का उद्देश्य इन युद्धों के प्रभाव, संबंधित कला, शिल्प, इतिहास और पुरातात्विक महत्व को आम लोगों तक पहुँचाना है।

हेमू समाधि स्थल

पानीपत का दूसरा युद्ध अफगान सेनापति हेमू और मुगल सेना के बीच लड़ा गया था। विजय के अत्यंत करीब पहुंच चुके हेमू की आंख में तीर लगने से वह घायल होकर बेहोश हो गया और उसे कैद कर लिया गया। बताया जाता है कि अकबर के सामने ले जाए जाने के दौरान ही जींद रोड के पास स्थित सौंधपुर में उसकी मृत्यु हो गई थी। उसी स्थान पर बाद में उसका समाधि स्थल बनाया गया।

काबुली बाग

काबुली बाग एक ऐतिहासिक परिसर है जिसमें एक बाग, मस्जिद और एक जलसरोवर शामिल है। इसे मुगल शासक बाबर ने पानीपत के पहले युद्ध में इब्राहिम लोदी पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में निर्मित करवाया था। इस स्थल का नाम बाबर की पत्नी मस्समत काबुली बेगम के सम्मान में रखा गया।

बाब-ए-फैज गेट

बाब-ए-फैज गेट, जिसे स्थानीय रूप से सलारगंज गेट भी कहा जाता है, ईंटों और पत्थरों से निर्मित एक ऐतिहासिक प्रवेश द्वार है। इसके शीर्ष पर उर्दू में एक शिलालेख दर्ज है जिसमें लिखा है “बाब-ए-फैज नवाब सादिक - 1129”। ‘बाब-ए-फैज’ का अर्थ है— समृद्धि का द्वार।

इब्राहिम लोदी की कब्र

पानीपत नगर समिति के एक पार्क में दिल्ली के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी की कब्र स्थित है। 21 अप्रैल 1526 को बाबर के साथ लड़ी गई पहली पानीपत की लड़ाई में इब्राहिम लोदी मारे गए थे। यह स्थान भारतीय इतिहास की एक निर्णायक घटना का स्मारक है और अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है।

3rd Battle of Panipat

पानीपत की तीसरी लड़ाई

पानीपत की तीसरी लड़ाई

सन् 1761 में लड़ी गई पानीपत की तीसरी लड़ाई का प्रमुख स्थल आज भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि युद्ध के दौरान मराठा सेना का नेतृत्व कर रहे सदाशिव राव भाऊ ने यहीं पर वीरगति प्राप्त की थी। इस स्थान को चिह्नित करने के लिए एक ईंटों से बना स्तंभ स्थापित किया गया है, जिसके शीर्ष पर लोहे की छड़ लगी हुई है, और पूरे क्षेत्र को लोहे की बाड़ से घेरा गया है। लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में स्थित इस स्थान पर पानीपत मेमोरियल सोसायटी द्वारा एक आकर्षक युद्ध स्मारक परिसर विकसित किया गया है, जो उस ऐतिहासिक संघर्ष की याद को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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