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केन-बेतवा प्रोजेक्ट का विरोध प्रदर्शन 16वें दिन खत्म, पुलिस ने खाली कराया स्थल, प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में अनशन कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस और प्रशासन ने रविवार सुबह हटा दिया। प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया, जबकि आंदोलनकारियों ने नेताओं को गिरफ्तार करने और पुनर्वास के वादे पूरे न होने का आरोप लगाया।

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केन-बेतवा परियोजना के विरोध में अनशन कर रहे प्रदर्शनकारी हटाए गए (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में 15 दिनों से अनशन कर रहे ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों को रविवार सुबह पुलिस और प्रशासन ने धरना स्थल से हटा दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा और बिगड़ती सेहत को देखते हुए उठाया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इसे जबरन कार्रवाई बताते हुए पुनर्वास के वादे पूरे न होने का आरोप लगाया।

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले 15 दिनों से ग्रामीण और प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हुए थे, जिन्हें पुलिस और प्रशासन ने रविवार सुबह प्रदर्शन स्थल से हटा दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर सहित कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए दावा किया कि स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों से सभी को ’प्रेम से व शांतिपूर्वक’ उनके घरों तक पहुंचा दिया गया है।

पुनर्वास की मांग को लेकर शुरू हुआ था अनशन

प्रदर्शनकारियों ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से संबंधी सरकार और प्रशासन के वादे अब तक पूरे नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए तीन जुलाई को यह अनिश्चितकालीन अनशन कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे शरू किया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने ’पीटीआई भाषा’ को बताया ग्रामीण जिस जगह पर आंदोलन कर रहे थे, वहां पर पुल निर्माण का काम हो रहा है तथा बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ रहा था, जो कि कभी भी खतरा बन सकता था। उन्होंने कहा कि लोग काफी दिनों से भूख हड़ताल पर थे, इसलिए उनका स्वास्थ्य भी गिर रहा था और कुछ की तबियत भी बिगड़ रही थी।

डॉक्टरों की टीम के साथ पहुंचा प्रशासन

पटले ने कहा कि पुलिस और प्रशासन की टीम चिकित्सकों के साथ यहां आई थी और सभी से स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की गई। उन्होंने कहा, "बढ़ते पानी की वजह से यह जगह भी सुरक्षित नहीं थी, इसलिए प्रेम और शांतिपूर्ण तरीके से उन्हें हटाया गया और सुरक्षित भेज दिया गया।" उन्होंने कहा कि अमित भटनागर भी भूख हड़ताल पर थे और उनका स्वास्थ लगातार गिर रहा था इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है।

आंदोलनकारियों ने गिरफ्तारी का लगाया आरोप

आंदोलनकारियों में शामिल उनकी एक अन्य प्रमुख नेता दिव्या अहिरवार ने कहा, "हमारा आंदोलन 3 जुलाई से लगातार अभी तक जारी है और भटनागर का आमरण अनशन भी जारी है।" उन्होंने कहा कि भटनागर आज केन-बेतवा में 400 करोड़ रुपये के एक कथित भ्रष्टाचार का मीडिया के समक्ष खुलासा करने वाले थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने सुबह 5 बजे ही हजारों की संख्या में भटनागर सहित सभी आंदोलनकारियों को आंदोलन स्थल से गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने कहा, "अमित भटनागर को कुछ भी होता है और हमारे आंदोलनकारियों में से एक भी व्यक्ति को खरोंच भी आती है तो उसका जिम्मेदार प्रशासन होगा, स्वयं मुख्यमंत्री होंगे।"

आदिवासी महिलाओं ने भी संभाला आंदोलन का मोर्चा

मुख्य रूप से आदिवासी महिलाओं की भागीदारी वाले इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप ’जल सत्याग्रह’, ’चिता सत्याग्रह’ और प्रतीकात्मक ’फांसी सत्याग्रह’ भी किया। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित की जा रही देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना के रूप में केन-बेतवा लिंक परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अधिशेष जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित कर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना है। हालांकि, परियोजना से प्रभावित कुछ परिवारों और पर्यावरण से जुड़े संगठनों ने विस्थापन, पुनर्वास तथा पन्ना बाघ अभयारण्य के हिस्सों सहित जंगलों और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर इसका विरोध किया है।

रुनझ और मझगांव परियोजना प्रभावित भी आंदोलन में शामिल

वर्तमान आंदोलन में रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं। उनका कहना है कि पुनर्वास को लेकर प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। छतरपुर जिला प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल 176 लोग पड़ोसी पन्ना जिले की रुनझ और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित हैं तथा उनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजा प्रक्रिया से संबंध नहीं है।

सरकार बोली- बुंदेलखंड के विकास के लिए जरूरी है परियोजना

प्रशासन ने एक बयान में प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटकर वहां के जिला प्रशासन से पुनर्वास का लाभ लेने का आग्रह किया।

प्रशासन का कहना है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल में जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया है।

(इनपुट - भाषा)

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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