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नीला ड्रम बना अब शिव भक्ति की पहचान, 121 लीटर गंगाजल ले जाता दिखा कांवड़िया

मेरठ के दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन अलग-अलग प्रकार की कांवड़ें देखने को मिल रही हैं, लेकिन बुधवार को एक अनोखे कांवड़ ने लोगों का ध्यान खींचा।

नई दिल्ली: मेरठ के दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन अलग-अलग प्रकार की कांवड़ें देखने को मिल रही हैं, लेकिन बुधवार को एक अनोखी कांवड़ ने लोगों का ध्यान खींचा। नीले ड्रम में 121 लीटर गंगाजल लेकर जा रही इस कांवड़ को देखकर यह कांवड़ चर्चा का विषय बन गई।

दरअसल, कुछ दिन पहले मेरठ में हुए सौरभ हत्याकांड में नीला ड्रम सुर्खियों में रहा था। इस केस में सौरभ की पत्नी मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ की हत्या कर दी थी और शव को नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से पैक कर दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर नीले ड्रम को लेकर कई मीम्स और रील्स वायरल हुए थे।

अब नीला ड्रम जब दिल्ली-देहरादून हाईवे पर एक कांवड़ के रूप में दिखाई दिया तो लोगों के बीच फिर से चर्चा शुरू हो गई। गाजियाबाद निवासी कांवड़िया द्वारा दो नीले ड्रम में 121 लीटर गंगाजल भरकर कांवड़ यात्रा पर निकलने से यह दृश्य खास बन गया।

जब इस अनोखे कांवड़ के बारे में पूछा गया तो भोले के भक्त ने बताया कि उन्हें अधिक जल लाने के लिए बड़े बर्तन की ज़रूरत थी। कलश बहुत महंगे थे, जबकि ड्रम उन्हें सस्ते दाम में मिल गए, इसलिए उन्होंने गंगाजल इन्हीं ड्रमों में भर लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वह जलाभिषेक के बाद अपने माता-पिता को पवित्र गंगाजल से स्नान कराएंगे।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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