शहर

कौन थे कैप्टन सुनील कुमार चौधरी? जिनके नाम से जाना जाएगा कठुआ स्टेशन

कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम अब शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी के नाम पर रखा गया है। अब यह स्टेशन 'शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन, कठुआ' के नाम से जाना जाएगा।

Image

कठुआ रेलवे स्टेशन का बदला नाम

जम्मू-कश्मीर : कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम अब शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी के नाम पर रखा गया है। अब यह स्टेशन 'शहीद कैप्टन सुनील कुमार चौधरी रेलवे स्टेशन, कठुआ' के नाम से जाना जाएगा। इस फैसले से पूरे क्षेत्र में गर्व और सम्मान का माहौल है। कैप्टन सुनील कुमार चौधरी ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था, और उनके सम्मान में यह कदम उठाया गया है।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा कि कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर "शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी कठुआ रेलवे स्टेशन" रखा गया है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने कठुआ की जनता की उस मांग पर तुरंत कार्रवाई की, जिसमें शहीद सुनील कुमार चौधरी के नाम पर कठुआ रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग की गई थी।

आपको बता दें कि स्थानीय लोग लंबे समय से स्टेशन के नाम को बदलने की मांग कर रहे थे। लोग चाहते थे कि शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी के नाम पर स्टेशन का नाम रखा जाए। लिहाजा, सरकार ने इस पर मुहर लगा दी है।

कौन थे शहीद कप्तान सुनील कुमार चौधरी?

दरअसल, कैप्टन सुनील चौधरी (1980-2008) भारतीय सेना की गोरखा रेजिनेंट में अधिकारी थे और 7/11 गोरखा राइफल्स से संबंधित थे। जानकारी के मुताबिक, साल 2026 में असम में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के लिए तैनात किया गया था। वे अपनी टुकड़ी की 'ए' कंपनी की कमान संभाल रहे थे। कहा जाता है कि महज एक महीने के भीतर ही उन्होंने प्रभावी तरीके से सभी अभियानों का नेतृत्व किया और यूएलएफए कैडर के दो शीर्ष कमांडरों को मार गिराया।

हाल ही में 27 जनवरी को उनकी 18वीं शहादत वर्षगांठ मनाई गई गई है। सेना के जवानों और स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने देश के लिए शहीद हो गए, उन्हें उनके पराक्रम और शहादत पर नाज है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article