Navratri 2023 Durga Mandir in Kanpur: नवरात्रि के ये 9 दिन देवी की उपासना के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए पुराणों में देवी माँ की पूजा अर्चना के कुछ नियम बताए हैं जिनका पालन करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस नवरात्रि के पावन अवसर पर हम जानेंगे कानपुर में स्थित ‘आदि-शक्ति स्वरूपा माँ जगदंबा’ के 5 रूपों के बारे में जहां जाने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस नव-रात्रि आप भी यहां जाकर दर्शन कर अपनी सारी मुरादों को पूरा कर सकते हैं।
बारा देवी मंदिर
कानपुर के दक्षिण में स्थित है बारा देवी मंदिर। इस मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि कानपुर के इस इलाके का नाम ही बारा देवी है। इस मंदिर में आने वाले लोग अपनी मनोकामना को लेकर एक चुनरी बांधते हैं और मनोकामना के पूरा हो जाने पर चुनरी को खोलने जाना होता है, और ये परंपरा सदियों से लगातार चली आ रही है। नवरात्रों में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
तपेश्वरी देवी मंदिर
बिरहना रोड़ पर स्थित है तपेश्वरी देवी मंदिर। इस मंदिर के विषय में चर्चा है की इस मंदिर में माता सीता ने तप किया था। ऐसी मान्यता है कि लव-कुश के जन्म के बाद माता सीता ने उनका मुंडन संस्कार यहीं कराया और इसके बाद लव-कुश को महर्षि वाल्मीकि को सौंपकर सीता माता ने इसी मंदिर में तप किया था, जिस कारण इस मंदिर का नाम तपेश्वरी देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
जंगली देवी मंदिर
कानपुर के इस प्रसिद्ध मंदिर में वर्ष भर भक्तों का तांता लगा रहता है। पर नवरात्र में यहाँ की महिमा और भी बढ़ जाती है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भी भक्त इस मंदिर में ईंट रखकर मन्नत मांगता है उसकी सारी मन्नत पूरी होती है। आप अपना घर बनाने की इच्छा लेकर इस मंदिर में जाना चाहते हैं तो प्रतिमा के पीछे बनी नाली में एक ईंट रख दें मकान निर्माण के काम के तेजी आयेगी और जल्दी घर का काम निपट जाएगा।
उजियारी देवी मंदिर
कानपुर के नवाब गंज में स्थित है मां उजियारी देवी मंदिर। यहां देवी के रूप में शीतला माता विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी महंत रजनीश शुक्ल बताते हैं कि माता के चरणों में चढ़ाया गया जल चेचक और त्वचा रोगों पर लगाने से समस्या में आराम मिलता है। नवरात्र के समय इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है भक्तों का मानना है कि मां उजियारी देवी सभी मनोकामना को पूरा करती है।
कुष्मांडा माता मंदिर
कानपुर के घाटमपुर इलाके में स्थित है कुष्मांडा माता का बेहद प्राचीन मंदिर। मान्यता है कि किसी समय यहां एक ग्वाला अपनी गायों को लेकर यहां चराने आता था एक गाय जैसे ही उस स्थान पर आती उसके थनों से दूध स्वयं निकलने लगता था। जब उस जगह की खुदाई की तो वहां से कुष्मांडा माता की प्राचीन प्रतिमा निकली। नवरात्रों में चतुर्थी तिथि को प्रतिमा का अनावरण हुआ था जिस कारण नवरात्रि की चतुर्थी तिथि को यहां भक्तों की भारी भीड़ रहती है।
