कानपुर

Kanpur से छुट्टी लेकर गायब हुए 161 पुलिसवाले, 6 महीने से तलाश रहा विभाग

कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में 161 पुलिसकर्मियों के अचानक गायब होने का चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। ये सभी छुट्टी पर गए थे, लेकिन अब तक ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे हैं। इनमें से कुछ तो पिछले 6 महीनों से लापता हैं। इस स्थिति को देखते हुए विभाग ने इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है।

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कानपुर : उत्तर प्रदेश में पुलिस कमिश्नरेट के 161 पुलिसकर्मी लापता हो गए हैं। ये सभी पुलिसकर्मी छुट्टी लेकर अपने गृह जनपद गए थे, लेकिन निर्धारित समय पर ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे। कुछ पुलिसकर्मी तो कई महीनों से गायब हैं। पुलिस विभाग ने इनकी तलाश के लिए बार-बार नोटिस भेजे, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस स्थिति के कारण, इन पुलिसकर्मियों को 'डिसलोकेट' श्रेणी में डाल दिया गया है। कानपुर कमिश्नरेट के चारों जोन, पुलिस लाइन, कार्यालय, और यातायात विभाग में तैनात ये पुलिसकर्मी छुट्टी पर गए थे, लेकिन समय पर ड्यूटी पर नहीं लौटे। पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि ऐसे मामलों में जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने लापता पुलिसकर्मियों की रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

मीडिया खबरों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर इस मामले ने चर्चा का विषय बना लिया है, जहां कई यूजर्स ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें निलंबन और बर्खास्तगी शामिल हो सकती है। डीसीपी मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि यह अनुशासनहीनता का गंभीर मामला है और सभी लापता पुलिसकर्मियों की जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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