Kanpur-Lucknow Rapid Rail Corridor: देशभर के विभिन्न हिस्सों को हाईस्पीड ट्रेनों के जरिए कनेक्ट करने की कवायत तेज कर दी गई है। शहरों में मेट्रो, लंबी दूरी के लिए राजधानी-शताब्दी के बाद वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सफलता के बाद नमो भारत (Namo Bharat) यानी रैपिड रेल की संख्या में इजाफा करने का निर्णय लिया गया है। फिलहाल, दिल्ली से मेरठ के बीच देश की पहली नमो भारत ट्रेन फर्राटा भर रही है, जिससे एनसीआर क्षेत्र में कामकाजी लोग रोजाना महज चंद मिनटों में अपने घर या गंतव्य तक का सफर तय कर रहे हैं। लेकिन अब यूपी के दो मुख्य शहरों के बीच कम समय में यात्रा कराने वाले प्लान पर बात आगे बढ़ चुकी है। आइये जानते हैं किन दो शहरों के बीच रैपिड रेल चलाने की योजना है?
| जानकारी | विवरण |
| परियोजना का नाम | कानपुर लखनऊ रैपिड रेल कॉरिडोर |
| ट्रेन का नाम | कानपुर लखनऊ नमो भारत |
| कानपुर लखनऊ रैपिड रेल कॉरिडोर के जिले | कानपुर, उन्नाव और लखनऊ |
| कानपुर लखनऊ रैपिड रेल कॉरिडोर रूट | अमौसी-आजाद पथ और नयागंज कानपुर |
| कानपुर लखनऊ रैपिड रेल के स्टेशन | अमौसी, उन्नाव और कानपुर |
| कानपुर लखनऊ रैपिड रेल की लागत | 10,000 करोड़ से 15000 करोड़ (अनुमानित) |
| लखनऊ-कानपुर नमो ट्रेन की स्पीड | 160 किमी. /घंटा |
| लखनऊ-कानपुर नमो ट्रेन चलने की तिथि | तय नहीं |
| कानपुर लखनऊ रैपिड रेल कॉरिडोर निर्माणकर्ता | NCRTC |
देश में कहां चल रही नमो भारत ट्रेन
फर्स्ट फेज के अंतर्गत दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर (Delhi-Ghaziabad-Meerut Corridor) पर नमो भारत ट्रेनें चल रही हैं। अब दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत और दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर (Delhi-Gurugram-SNB-Alwar Corridor) पर भी काम चल रहा है। तीनों कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां नमो भारत स्टेशन पर मिलेंगे। ऐसे में यात्री बिना स्टेशन बदले एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर तक यात्रा कर सकेंगे। यानी एक बार नमो भारत ट्रेन में सवार होने के बाद आपको अंतिम मील तक स्टेशन से बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी और आप सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
यूपी की राजधानी और उत्तर भारत का मैनचेस्टर जुड़ेगा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और कभी उत्तर भारत के मैनचेस्टर कहे जाने वाले शहर कानपुर के बीच यात्रियों को नमो भारत ट्रेन में सफर करने का मौका मिलेगा। रेलवे दोनों शहरों के बीच रैपिड रेल चलाने के प्लान पर काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, यह ट्रेन पूर्णतया एसी रहित होगी और मेट्रो की तर्ज पर संबधित स्टेशनों पर स्टॉप लेगी।
लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल के 67 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को मंजूरी मिल चुकी है। लखनऊ-कानपुर नमो भारत ट्रेन चलने से रोजना आवागमन करने वाले यात्रियों को बड़ी सहूलियत होगी। नमो भारत ट्रेन के जरिए 67 किलोमीटर दूरी के 2 घंटे का सफर महज 40 मिनट में कवर होगा। इस दौरान ट्रेन की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है। जैसा की नमो भारत भारत की सबसे तेज गति से चलने वाली ट्रेन है।

नमो भारत ट्रेन.
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC) ने इस रेल कॉरिडोर का स्ट्रक्चर तैयार किया है, जिसे नमो भारत कॉरिडोर नाम दिया गया है। इस 67 किमी. लंबे कॉरिडोर में तीन जिले कानपुर, उन्नाव और लखनऊ शामिल हैं। कॉरिडोर के निर्माण के लिए विस्तृत रिपोर्ट (DPR) बनाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए एक हाई पावर कमेटी ने एनएसआरटी को रिपोर्ट भेजी है, जिसके बाद तीनों जिलों के प्राधिकरणों के बीच समन्वय बनाया जाएगा। यह कमेटी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति, निर्माण स्वीकृति और विभागीय समस्याओं से निपटने के लिए काम करेगी।
लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल कॉरिडोर रूट मैप-स्टेशन
रैपिड रेल कॉरिडोर अमौसी हवाई अड्डे (Amausi Airport) के पास शुरू होकर उन्नाव जिले को पार करते हुए कानपुर में प्रवेश करेगा। फिलहाल, इस रूट पर नमो भारत ट्रेन के लिए तीन स्टॉप तय किए गए हैं, जिनमें लखनऊ, उन्नाव और कानपुर मुख्य हैं। हालांकि, आगे भविष्य में जरूरत के मुताबिक, इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है।
नमो भारत ट्रेन का फीचर
नमो भारत ट्रेन में 12 कोच होंगे, जिसकी 3200 यात्रियों की झमता होगी। इस ट्रेन को मेट्रो की तरह डिजाइन किया गया है, जिसमें बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा कवच का पूरा ख्याल रखा गया है। रेलवे के मुताबिक, यूपी में मेरठ से सहारनपुर के बीच भी नमो भारत ट्रेन चलाने का प्लान है।

नमो भारत ट्रेन
लखनऊ-कानपुर रैपिड रेल कॉरिडोर की अनुमानित लागत
अगर दिल्ली-गाजियाबाद से मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर की लागत को देखें तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कानपुर-लखनऊ रैपिड रेड कॉरिडोर की लागत 10,000 करोड़ से 15000 हजार करोड़ रुपये हो सकती है। हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। इसमें जमीन अधिग्रहण से लेकर निर्माण कार्य शामिल होंगे। हालांकि, इस लागत में बढ़ोतरी या कमी भी आ सकती है।
लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर रूट के गांव
लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर में कई गांव शामिल होंगे, जिनमें खासकर बनी, कांथा, अमरसास और पिपरसंड हो सकते हैं। यह कॉरिडोर अमौसी एयरपोर्ट से शुरू होकर संबंधित गांवों से होकर गुजरेगी। हालांकि, अभी रूट के सभी गांवों के नाम सामने नहीं आ सके हैं। लेकिन अलग से रूट डेवलप होने पर किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है, जिसके लिए मुआवजे के लिए बड़ी रमक अदा करनी होगी। किसानों को सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा मिलने पर आर्थिक समृद्धि होगी। हालांकि, यह कॉरिडोर कब पूरा होगा और इस रूट पर नमो भारत ट्रेन कब चलेगी, अभी इसकों लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर के लाभ
वहीं, स्टेशनों के आसपास होटल, रेस्टोरेंट समेत अन्य जरूरत की सामान के लिए दुकानें खोली जाएंगी, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, रोजाना नौकरी पेशा या व्यापार के वास्ते आने जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से परिवहन के क्षेत्र में रोजगार के चांस बढ़ेंगे।
