कानपुर

टीवी बंद रखें! 'भारत-पाक मैच से होगी कमाई', क्रिकेटर्स-BCCI पर बरसीं पहलगाम हमले में मारे गए शुभम की पत्नी

भारत-पाकिस्तान T20 एशिया कप 2025: भारत और पाकिस्तान के बीच का मुकाबला हमेशा से ही दर्शकों के लिए रोमांचक रहा है। हर कोई इस मैच को देखने के लिए उत्सुक रहता है। लेकिन इस बार कुछ लोग इस मैच को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। दरअसल, पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी की पत्नी, ऐशन्या द्विवेदी, ने भारत-पाक मैच का विरोध किया है।

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platform desk

कानपुर : एशिया कप 2025 का भारत-पाकिस्तान मैच 14 सितंबर को होने वाला है, जिसे लेकर देश में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ हैं। इस मैच के विरोध में शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशन्या द्विवेदी ने आवाज उठाई है, जो पहलगाम आतंकी हमले में अपने पति को खो चुकी हैं। उन्होंने देशवासियों से इस मैच का बहिष्कार करने की अपील की है, यह कहते हुए कि यह उन परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।

ऐशन्या ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और क्रिकेटरों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि BCCI को इस मैच को आयोजित करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेटरों को अपने देश के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए और इस मैच का विरोध करना चाहिए। ऐशन्या ने मैच से होने वाले राजस्व पर चिंता जताई, यह कहते हुए कि यह पैसा पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

उन्होंने स्पॉन्सर्स और ब्रॉडकास्टर्स से सवाल किया कि क्या वे उन 26 शहीद परिवारों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। उनका मानना है कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है और इस मैच से होने वाली कमाई का उपयोग भारत के खिलाफ हमलों के लिए किया जाएगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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