देशभर के अधिकांश राज्यों में गर्मी के साथ लू का असर बढ़ता दिखाई दे रहा है। कई राज्यों में अधिकतम तापमान में 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जो हीटवेव की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, पिछले दिनों हुईं मौसमी गतिविधियों के असर से उत्तर भारत में मामूली तौर पर तापमान कंट्रोल है, लेकिन आने वाले दिन परेशान करने वाले हो सकते हैं। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि सप्ताह के अंत तक हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश में पछुआ हवाओं की गति तेज होगी, जिससे लू का सिलसिला शुरू हो सकता है। हालांकि, पहाड़ों पर 17 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसके प्रभाव से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ पर्वतीय हिस्सों पर गरज-चमक से साथ आंधी-बारिश का अनुमान है। अगले 24 घंटे के दौरान पूर्वोत्तर में साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण अरुणाचल प्रदेश, पूर्वी असम, नागालैंड में तूफानी हवाओं के साथ बादलों के बरसने का अलर्ट है। स्काईमेट ने बुधवार को केरल, अंडमान निकोबार द्वीप समूह समेत तटीय हिस्सों पर आंधी-बारिश के संकेत दिए हैं। अगले 5 दिन तक मराठवाड़ा, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में भीषण लू की चेतावनी है।
यूपी का मौसम कैसा रहेगा
उत्तर प्रदेश में मौसम काफी गर्म होता प्रतीत हो रहा है। दिनभर चल रहीं पछुआ गर्म हवाएं लू के संकेत दे रही हैं। मौसम विभाग का मानना है कि सप्ताह के अंत तक 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर, बुंदेलखंड के जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है, जिसके बाद लू का अलर्ट जारी कर दिया जाएगा। फिलहाल बांदा में तापमान 40 डिग्री पहुंच गया है, जो राज्य में सबसे ज्यादा है। फिलहाल बारिश को लेकर कोई अलर्ट नहीं है।
बिहार में मौसम कैसा रहेगा
बिहार में फिलहाल कोई मौसमी सिस्टम एक्टिव नहीं है, जिससे पारा धीरे-धीरे ऊपर की ओर शिफ्ट हो रहा है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 4 दिन बाद करीब 4 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान बढ़ सकता है, जिसके बाद गर्मी का असर तेज होगा। कयास ये भी हैं 40 डिग्री तापमान पहुंचते ही कैमूर, रोहतास, गयाजी, औरंगाबाद, नवादा, बक्सर में हीटवेव का अलर्ट घोषित होगा, जिसके बाद लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। हालांकि, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार में आंशिक तौर पर बादलों की आवाजाही और एक दो जगह बारिश की संभवना व्यक्त की गई है।
दिल्ली-एनसीआर में मौसम कैसा रहेगा
दिल्ली-एनसीआर में मौसम धीरे-धीरे गर्मी की ओर शिफ्ट हो रहा है। मौसम विभाग का अनुमान कि सप्ताह के आखिर तक लू की गतिविधियां हो सकती हैं। फिलहाल, अगले 2 दिन तक अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस के आसपस रहने का अनुमान है। हालांकि, अब पछुआ हवाओं की गति अधिक होने से पॉल्यूशन का लेवल कंट्रोल है, जिससे लोगों को साफ हवा मिलने के आसार बढ़ गए हैं। सीपीसीबी के मुताबिक, एक्यूआई 150 के आसपास है जो मध्यम श्रेणी में आता है। एक्यूआई शून्य से 50 के बीच अच्छा, 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है। आने वाले दिनों में गर्म हवाएं चलने से प्रदूषण तेजी से नियंत्रण होने की संभावान है। फिलहाल, अगले 3 दिन तक बारिश को लेकर कोई अनुमान नहीं है।
राजस्थान में कैसा रहेगा मौसम
राजस्थान में मौसम बेहद गर्म होता जा रहा है। पिछले दिनों हुईं मौसमी गतिविधियों के बाद अब मौसम साफ है और सूरज अपनी चमक बिखेरता जा रहा है। आईएमडी के मुताबिक, बाड़मेर और जैसलमेर में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। फिलहाल अगले 2 सप्ताह तक कोई मौसमी सिस्टम एक्टिव होने की संभावना नहीं है। लिहाजा गर्मी का असर तेज होगा।
हिमाचल में बारिश होगी क्या
पहाड़ों पर अगले तीन दिन मौसम साफ रह सकता है, लेकिन 17 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है, जिसके प्रभाव से हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों पर मौसम बदलने के संकेत हैं। मौसम विभाग ने, शुक्रवार से रविवार तक शिमला, सिरमौर, सोलन, मंडी, चंबा, किन्नौर और लाहौल स्पीति, चंबा समेत कई अन्य ऊंचे भागों पर तेज अंधड़ के साथ बारिश और ओलावृष्टि होने का येलो अलर्ट जारी किया है। हालांकि, अगले 72 घंटे भी बादलों की आवाजाही रह सकती है, लेकिन तेज मौसमी गतिविधियां होने का अनुमान नहीं है।
उत्तराखंड में मौसम कैसा रहेगा
उत्तराखंड में 15 अप्रैल तक आंशिक तौर पर बादलों की आवाजाही के अतिरिक्त बारिश को लेकर कोई बड़ा अलर्ट नहीं है, लेकिन 16 अप्रैल से नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव होने से कई ऊंचाई वाले स्थानों पर आंधी, बारिश एंव ओले गिरने का अलर्ट है। मौसम विभाग के मुताबिक, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में बादलों की गरज चमक, 50 से 60 किमी. की रफ्तार वाली हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि, मैदानी जिलों पर मौसम शुष्क रहेगा।
केरल-तमिलमाडु में लू का अलर्ट
मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण भारत में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन अभी सक्रिय रहेगा, जिसका आंशिक असर तटीय राज्यों के कुछ हिस्सों पर रहेगा। लेकिन, अधिकांश राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर पहुंच गया है, जिससे लू की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। आईएमडी ने केरल के तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, त्रिशूर, कोझिकोड, अलाप्पुझा, कोट्टायम, कन्नूर और कासरगोड समेक कई जिलों में भी तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। उधर, तमिलनाडु में भी भीषण गर्मी के शुरुआत हो चुकी है। यहां भी अधिकांश जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। मदुरै हवाई अड्डे, नमक्कल, तिरुपत्तूर, कोयंबटूर, मदुरै शहर, सलेम और धर्मपुरी, पलायमकोट्टई और तिरुचिरापल्ली में पारा लगभग 38 डिग्री तक बढ़ गया, जो भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के संकेत हैं। हालांकि, वीकेंड पर मामली राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग ने निम्न दबाव के क्षेत्र से कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश होने की आशंका जताई है। खासकर, पश्चिमी घाट जिलों, डेल्टा क्षेत्रों और रामनाथपुरम के तटीय इलाकों में रविवार तक छिटपुट बारिश होने की संभावना है। उधर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आंधी बारिश की गतिविधियां हो सकती हैं।
15 अप्रैल बुधवार का तापमान
| शहर का नाम | न्यूनतम तापमान | अधिकतम तापमान |
| दिल्ली | 23°C | 37°C |
| चंडीगढ़ | 20°C | 34°C |
| मुंबई | 26°C | 32°C |
| चेन्नई | 27°C | 34°C |
| बेंगलुरु | 22°C | 36°C |
| कोलकाता | 27°C | 37°C |
| रांची | 22°C | 34°C |
| पटना | 22°C | 37°C |
| लखनऊ | 24°C | 38°C |
| भोपाल | 25°C | 38°C |
| जयपुर | 25°C | 37°C |
| देहरादून | 15°C | 29°C |
| शिमला | 12°C | 24°C |
| कश्मीर | 7°C | 17°C |
कब आएगा मानसून?
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि प्री मानसून जल्द ही दस्तक देख सकता है। हालांकि, जून महीने के दौरान मानसून एंट्री दे सकता है, लेकिन गति थोड़ी धीमी रहेगी और अत्यधिक बारिश की संभावना नहीं है। माना जा रहा है कि जून में उत्तर पश्चिम भारत में भीषण लू और गर्म हवाएं चलेंगी, लेकिन दक्षिण और पूर्वोत्तर में बारिश की गतिविधियां बढ़ने से तीव्र मानसून के आगे बढ़ने के आसार रहेंगे। हालांकि, मानसून सामान्य से कम रहेगा। उत्तर भारत में कम बल्कि पूर्वोत्तर भारत बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय में बेहतर बारिश को होने की उम्मीद है।
हीटवेव क्या है?
मार्च की शुरुआत से ही अधिकांश राज्यों में तापमान बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 2 से 4 दिन में तेलंगाना, विदर्भ, मराठवाड़ा, तमिलनाडु और रायमसीला में दिन का तापमान तेजी से बढ़ सकता है। अगले 10 दिन में 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मैदानी इलाकों में हीटवेव के 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना आवश्यक है, जो सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होना चाहिए। तटीय क्षेत्रों के लिए यह सीमा 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए 30 डिग्री सेल्सियस निर्धारित है। इस दौरान डीहाइड्रेशन, हीट क्रैम्प्स और जानलेवा हीटस्ट्रोक होने का खतरा बढ़ सकता है। ले चलमे से चक्कर आना, बेहोशी इत्यादि आने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
गर्मी कहां पड़ रही
देश के अधिकांश भागों पर तापमान में बढ़ोतरी जारी है। हालांकि, अभी भी हिमालयी राज्यों पर बर्फबारी से मौसम सर्द है, लेकिन उत्तर भारत में न्यूनतम और अधिकतम तापमान बढ़ रहा है। लिहाजा, अगले सप्ताह तक मौसम काफी गर्म महसूस होगा। फिलहाल, दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और गुजरात, महाराष्ट, छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के अधिकांश भागों पर गर्मी का सिलसिला शुरू हो गया है। जल्द ही कुछ राज्यों में लू और सनबर्न का अलर्ट जारी हो सकता है।
सनबर्न क्या होता है?
गर्मी का सीजन शुरू होने के संकेत मिलने लगे है। लिहाजा गर्मियों के सीजन से बचाव के लिए सनबर्न का अलर्ट जारी किया जाता है। दरअसल, एक्सपर्ट के मुताबिक, सनबर्न त्वचा के लिहाज से काफी हानिकारक माना जाता है। चिकित्सीय भाषा में इसे डर्माटाइटिस सोलारिस कहा जाता है। सनबर्न सूरज की यूवी किरणों के अधिक संपर्क में आने से होती है। इससे स्किन पर इरिटेशन होने लगती है, जिससे त्वचा में छाले, सूजन और लाल दाग पड़ने लगते हैं और दर्द महसूस होता है। यानी की अधिकांश केस में स्किन झुलस जाती है, जिससे उसका कलर डार्क प्रतीत होता है।
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FAQs
पश्चिमी विक्षोभ क्या होता है
उत्तर भारत और पहाड़ों पर अक्सर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की सूचना मिलती है। इसके प्रभाव से आंधी-बारिश की गतिविधियां दर्ज की जाती हैं। तो लोग जानना चाहते हैं कि पश्चिमी विक्षोभ क्या है? तो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कोई तूफान नहीं होता, बल्कि यह एक पूरा मौसमी सिस्टम होता है। इसे विज्ञान की भाषा में एक्स्ट्राट्रॉपिकल डिस्टर्बेंस कहा जाता है। इसका मतलब है ऐसा दबाव तंत्र जो उष्णकटिबंधीय इलाकों के बाहर बनता है और ठंडी नम हवाओं के साथ आगे बढ़ता है। आईएमडी के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर भूमध्यसागर, कैस्पियन सागर या ब्लैक सी के आसपास जन्म लेता है, जहां ठंडी ध्रुवीय हवाएं और अपेक्षाकृत गर्म समुद्री सतह आपस में टकराती हैं। जब इन क्षेत्रों में वायुमंडलीय अस्थिरता बढ़ती है तो वहां कम दबाव का क्षेत्र बनता है। यही कम दबाव आगे चलकर पश्चिमी विक्षोभ का रूप लेता है। यह सिस्टम अपने साथ नमी, बादल और ठंडी हवाएं लेकर चलता है और धीर-धीरे पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ता है।
