Jhansi Fake Call Center Busted: उत्तर प्रदेश की झांसी पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए किए जा रहे एक बेहद शातिर और अनोखे ऑनलाइन महाघोटाले का भंडाफोड़ किया है। यहां नवाबाद थाना क्षेत्र में एक ऐसा फर्जी मैट्रिमोनियल (शादी) कॉल सेंटर चल रहा था, जो अधेड़ उम्र (40 साल या उससे अधिक) के कुंवारे या अकेले पुरुषों को AI से बनी बेहद खूबसूरत और काल्पनिक युवतियों की तस्वीरें भेजकर अपने जाल में फंसाता था।
पुलिस की छापेमारी में इस हाई-टेक गैंग के 11 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 9 युवतियां और 2 पुरुष शामिल हैं। यह गिरोह अब तक देश भर के 150 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा चुका है।
कैसे काम करता था 'AI जनरेटेड' हसीनाओं का यह सिंडिकेट?
झांसी की एएसपी (ASP) अरीबा नोमान ने इस सनसनीखेज साइबर फ्रॉड के काम करने के तरीके का खुलासा करते हुए बताया कि इस गैंग ने बकायदा एक कॉर्पोरेट स्टाइल में कॉल सेंटर सेटअप कर रखा था:
अधेड़ उम्र के लोगों को टारगेट: यह गैंग शादी की वेबसाइट्स या अन्य माध्यमों से ऐसे पुरुषों का डेटा जुटाता था जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है और जो शादी के लिए योग्य वधु की तलाश कर रहे हैं।
लड़कियों को दी जाती थी स्पेशल ट्रेनिंग: कॉल सेंटर में काम करने वाली 9 स्थानीय लड़कियों को क्लाइंट्स से मीठी और प्रोफेशनल आवाज में बात करने की बकायदा ट्रेनिंग दी गई थी। ये लड़कियां खुद को शादी की इच्छुक युवती या मैरिज ब्यूरो की मैनेजर बताकर बात करती थीं।
AI फोटो का खेल: बातचीत आगे बढ़ने पर ये लोग असली लड़कियों की जगह AI (Artificial Intelligence) से तैयार की गई ऐसी डिजिटल तस्वीरें भेजते थे जो हूबहू असली इंसान जैसी दिखती थीं, ताकि सामने वाले को कोई शक न हो।
चंदे के नाम पर 'फीस' और फिर अश्लील रिकॉर्डिंग से ब्लैकमेलिंग
जैसे ही पीड़ित पुरुष उस काल्पनिक लड़की की तस्वीर देखकर शादी के लिए तैयार हो जाता, असली खेल तब शुरू होता था:
रजिस्ट्रेशन और फाइल चार्ज: गिरोह प्रोफाइल आगे बढ़ाने और शादी पक्की कराने के नाम पर एडवांस फीस के रूप में ₹30,000 से ₹40,000 ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लेता था।
नंबर ब्लॉकिंग: पैसे मिलते ही शुरुआती तौर पर वे क्लाइंट का नंबर ब्लॉक कर देते थे।
सेक्स्टॉर्शन (Sextortion) और ब्लैकमेलिंग: कई मामलों में, बातचीत के दौरान जाल में फंसी लड़कियां क्लाइंट से अश्लील या डबल मीनिंग बातें करती थीं। गैंग इन कॉल्स को रिकॉर्ड कर लेता था। इसके बाद पीड़ित को उसकी आवाज की रिकॉर्डिंग समाज और परिवार में वायरल करने की धमकी देकर लाखों रुपये जबरन वसूले (Extortion) जाते थे। बदनामी के डर से लोग चुपचाप पैसे दे देते थे।
राय कॉलोनी के मकान में पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक
नवाबाद थाना पुलिस को लगातार मिल रही गुप्त शिकायतों के बाद, पुलिस की एक संयुक्त टीम ने राय कॉलोनी के एक संदिग्ध मकान पर अचानक छापा मारा। मौके का नजारा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई, जहां दर्जनों मोबाइलों और कंप्यूटर सिस्टम के साथ पूरा सिंडिकेट ऑपरेट हो रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की प्रोफाइल
साहिल साहू और हलधर साहू: ये दोनों मुख्य संचालक और मास्टरमाइंड हैं, जो मूल रूप से चांपा, छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और झांसी में आकर यह नेटवर्क चला रहे थे।
9 युवतियां: ये सभी झांसी और आसपास के इलाकों की रहने वाली हैं, जिन्हें कॉलिंग और ब्लैकमेलिंग के काम पर रखा गया था।
7 बैंक खाते सीज; ₹41 लाख कैश फ्रीज
पुलिस ने इस फर्जी कॉल सेंटर से तकनीकी और वित्तीय अपराध से जुड़े कई अहम सबूत और गैजेट्स बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹9 लाख आंकी गई है:
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: 9 एंड्रॉइड स्मार्टफोन, 17 कीपैड वाले फोन और कंप्यूटर सिस्टम (जिसका इस्तेमाल AI फोटो जनरेट करने और डेटा रखने में होता था)।
बैंकिंग दस्तावेज: 16 एटीएम (ATM) कार्ड्स, 6 चेकबुक और दर्जनों रजिस्टर जिनमें शिकार हुए 150 लोगों के नाम, नंबर और पैसों का पूरा हिसाब-किताब दर्ज है।
बड़ी वित्तीय कार्रवाई: साइबर सेल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इस गैंग द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 7 बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया है, जिनमें ठगी के ₹41 लाख रुपये जमा थे।
झांसी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत मैट्रिमोनियल कॉल सेंटर या सोशल मीडिया पर अनजान लड़कियों की प्रोफाइल और शादी के प्रस्तावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। पैसे ट्रांसफर करने से पहले हमेशा जांच-पड़ताल अवश्य करें।
