शहर

जैसलमेर में ऊंट से टकराकर पलटी सेना की गाड़ी, मेजर हमजा आरिफ की मौत, एक महीने पहले ही हुई थी शादी; दो लेफ्टिनेंट घायल

राजस्थान के जैसलमेर में सड़क हादसे में सेना के मेजर हमजा आरिफ की मौत हो गई, जबकि दो लेफ्टिनेंट घायल हैं। वाहन की ऊंट से टक्कर के बाद यह दर्दनाक घटना हुई।

Image

(सांकेतिक फोटो-Istock)

जैसलमेर : जिले से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां गुरुवार देर रात एक सड़क हादसे में भारतीय सेना के एक मेजर की जान चली गई। इस हादसे में उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनका इलाज सैन्य अस्पताल में चल रहा है।

हादसा कैसे हुआ?

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह हादसा जैसलमेर शहर से लगभग 18 किलोमीटर दूर थईयात सेना क्षेत्र के पास हुआ। मेजर हमजा आरिफ (26) अपने दो साथी अधिकारियों (लेफ्टिनेंट) के साथ सैन्य अड्डे से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क पर अचानक एक ऊंट सामने आ गया, जिससे बचने के प्रयास में उनका वाहन अनियंत्रित हो गया और ऊंट से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी लगभग 100 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई।

मेजर की एक महीने पहले ही हुई थी शादी

इस हादसे में मेजर हमजा आरिफ की मौके पर ही स्थिति गंभीर हो गई थी। उन्हें तुरंत सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि मेजर हमजा मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले थे और उनकी शादी को अभी केवल एक महीना ही हुआ था। इस खबर के बाद से पूरे इलाके और उनके परिजनों में शोक की लहर है।

घायलों का चल रहा इलाज

हादसे में घायल हुए दो लेफ्टिनेंट, आयुष्मान और अभिनव राठौड़ का सैन्य अस्पताल में उपचार चल रहा है। सदर पुलिस थाना अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारणों और परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है। यह घटना रेगिस्तानी इलाकों में रात के समय सड़क पर मवेशियों के अचानक सामने आने के खतरे को भी रेखांकित करती है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article