जयपुर

Navratri 2023: पहाड़ों पर बसे हैं भारत के ये 5 प्रसिद्ध माता के मंदिर, नवरात्र में दर्शन से होगा कल्याण

Navratri 2023: भारत में ज्यादातर माता के प्रसिद्ध मंदिर पहाड़ों में बसे हैं, जिनकी महिमा देश ही नहीं विश्व में विख्यात है। आज हम आपको देश के अलग-अलग राज्यों की पहाड़ियों में विराजित माता के 5 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में आपको बताएंगे...

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पहाड़ों पर माता का मंदिर

Photo : Twitter

जयपुर: 15 अक्टूबर यानी से आज से शारदीय नवरात्र पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो चुका है। रविवार को घट स्थापना के साथ ये पर्व 23 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। ज्योतिष पंडितों की मानें तो इस वर्ष शारदीय नवरात्र पूरे 9 दिनों के होंगे। कहा जा रहा है कि 30 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। शारदीय नवरात्र पर बुधादित्य योग, शश राजयोग और भद्र राजयोग बन रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त व्रत रहने के साथ माता के मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए जाते हैं। इसी कड़ी में आज हम देश के ऐसे 5 मंदिरों का जिक्र करेंगे जो पहाड़ों में बसे हैं। मान्यता है अगर, नवरात्र के वक्त भक्त यहां दर्शन पूजन को जाते हैं तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

गौर करें तो भारत में माता रानी के ज्यादातर मंदिर पहाड़ों पर बसे हुए हैं। इनमें से कई मंदिर बेहद प्रसिद्ध हैं, जहां साल के 12 महीने भक्त अपनी अर्जी लगाने पहुंचते हैं, जिसमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय मंदिर माता वैष्णो देवी कटरा का माना जाता है। यहां दर्शन के अलावा लोग ट्रैवल करना बेहद पसंद करते हैं। तो अगर आप भी इस नवरात्र कहीं घूमने जाने का प्लान कर रहे हैं तो हम आपको 5 ऐसे मंदिर इंगित कर रहे हैं, जहां की महिमा जान आप खुद ही दौड़े जाएंगे।

माता वैष्णो देवी मंदिर

माता वैष्णो का यह मंदिर जम्मू के कटरा में स्थित है। माता का यह बेहद खूबसूरत मंदिर पहाड़ की एक चोटी पर बना हुआ है। इतिहासकार कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण आज से 700 साल पूर्व पंड़ित श्रीधर ने कराया था, वो माता के अनन्य भक्त थे। माता और पंडित धर से जुड़े कई किस्से भी प्रचलित हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां वैष्णों के दर्शन तब तक पूर्ण नहीं होते, जब तक यहां स्थित भैरो बाबा के दर्शन न कर लें। मौजूदा समय में श्रद्धालुओं के लिए एक और खुशखबरी निकल कर आ रही है। बताया जा रहा है कि भारत पाक विभाजन के बाद से बंद पड़े माता वैष्णो देवी के पारंपरिक मार्ग को खोलने की तैयारी है। इस रास्ते में देश विभाजन से पहले के कई मंदिर बने हुए हैं। तो अगर, आप इस नवरात्र घूमने का प्लान बना रहे हैं तो माता वैष्णो की यात्रा आपके लिए रोमांचकारी हो सकती है।

Shri Mata Vaishno Devi

माता वैष्णो देवी मंदिर

अर्बुदा देवी मंदिर

राजस्थान के माउंटआबू स्थित अर्बुदा देवी मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां मां कात्यानी की गुप्त रूप में पूजा होती है। इसकी यही सबसे बड़ी खासियत इस शक्ति पीठ को अलग बनाती है। गुजरात के अंबाजी शक्तिपीठ से भी इसका संबंध है। बताते हैं कि वहां महागौरी अंबाजी आठवें स्वरूप में हैं। ये दोनों आपस में बहनें हैं। पंडित बताते कि यहां पर मां के होंठ गिरे थे, इसलिए इसे अधर देवी कहते हैं। यहां तक कि स्कंद पुराण में भी माता के इस गुफा में छठे स्वरूप कात्यानी के रूप में विराजने का जिक्र मिलता है। यहां नवरात्र के 9 दिनों तक भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना करते हैं। मंदिर के पास ही अर्बुदा देवी का चरण पादुका मंदिर भी स्थित है, जहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

Arbuda Devi Temple

अर्बुदा देवी मंदिर

चामुंडेश्वरी मंदिर

कर्नाटक के प्रसिद्ध मैसूर शहर से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर श्री चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है। करीब 1000 साल से भी अधिक पुराना यह मंदिर माँ दुर्गा के चामुंडा रूप के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि माँ दुर्गा ने यह रूप देवताओं को महाशक्तिशाली राक्षस महिषासुर के अत्याचार से मुक्त कराने के लिए लिया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस चामुंडी पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है, उसी स्थान पर माता चामुंडा ने महिषासुर का वध किया था। यह तीर्थ 18 महाशक्तिपीठों में से खास है।

Chamundeshwari Temple

चामुंडेश्वरी मंदिर

बम्लेश्वरी माता मंदिर

बम्लेश्वरी माता मंदिर छत्तीसगढ के डोंगरगढ़ की पहाड़ियों में स्थित है। करीब 2 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ये मंदिर पहाड़ की हरियाली से सभी का मन मोह लेता है। कहा जाता है माता बम्लेश्वरी 10 महाविद्याओं में से एक बगलामुखी देवी का ही स्वरूप हैं। इस मंदिर में साल भर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहता है। खासकर, नवरात्र के दिनों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां उमड़ती है। इससे जुड़ा कथानक है कि 22 सौ वर्ष पूर्व यहां राजा वीरसेन का शासन था। वह प्रजापालक राजा थे, लेकिन एक दु:ख था कि उनकी कोई संतान नहीं थी। पंडितों के बताए अनुसार, उन्‍होंने पुत्र रत्‍न की प्राप्ति के लिए शिवजी और मां दुर्गा की उपासना की और नगर में मां बम्‍लेश्‍वरी के मंदिर की स्‍थापना करवाई। इसके बाद उन्‍हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई। ऐसा माना जाता है कि जिनकी गोद सूनी वो महिलाएं यहां आकर माता से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगती हैं।

Bambleshwari Temple

बम्लेश्वरी माता मंदिर

तारा तारिणी माता मंदिर

तारा तारिणी आदि शक्ति पीठ माता का मंदिर ओडिशा के गंजम जिले के ब्रह्मपुर शहर में स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के आधार पर माना जाता है कि भारत में 51 या 52 शक्तिपीठ हैं। लेकिन, 4 ऐसे स्थान हैं, जिन्हें आदि शक्तिपीठ के रूप में मान्यता है। तारा तारिणी मंदिर उन्हीं आदि शक्ति पीठों में से एक है, जिसे ‘स्तन पीठ’ के नाम से भी लोग जानते हैं। चूंकि, यहां माता सती के दोनों स्तन, ऋषिकुल्या नदी के किनारे स्थित कुमारी पहाड़ी पर गिरे थे। तारा तारिणी मंदिर को शाक्त संप्रदाय के उन प्रमुख स्थानों के रूप में जाना जाता है, जहाँ तंत्र विद्या का प्राचीन इतिहास रहा है।

Maa Tara Tarini Temple

तारा तारिणी माता मंदिर

तो हमने इस स्टोरी में भारत के अलग-अलग राज्यों के पहाड़ों में बसने वाले 5 प्रसिद्ध मंदिर बताए हैं। ये सभी मंदिर अपने आप में विलक्षण हैं। सैर के उद्देश्य और धार्मिक नजरिए से भी ये जगहें बेहद खूबसूरत और खास हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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