Ranthambore Noise Ban: सवाई माधोपुर प्रशासन ने रणथंभौर बाघ अभयारण्य के पास तेज आवाज वाले उपकरणों जैसे लाउडस्पीकर, डीजे सेट और लेजर लाइट के उपयोग पर कड़ा प्रतिबंध लागू किया है। सोमवार को जारी आधिकारिक आदेश में बताया गया कि यह कदम वन्यजीवों पर बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के नुकसान को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। जिलाधिकारी कानाराम के निर्देश के अनुसार, अभयारण्य से सटे गांवों और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में शादी, पार्टी या किसी अन्य कार्यक्रम में तेज आवाज वाले उपकरणों का इस्तेमाल जंगल के जानवरों को प्रभावित कर रहा था। यही वजह है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में ऐसे सभी उपकरणों पर पूरी तरह रोक रहेगी। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक इन्हें केवल निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर ही चलाने की अनुमति होगी। साथ ही, इस दायरे में लेज़र लाइट का उपयोग भी अब बिना पूर्व अनुमति के नहीं किया जा सकेगा।
वन्य प्रजातियों पर नकारात्मक प्रभाव
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रणथंभौर कई दुर्लभ वन्य प्रजातियों का महत्वपूर्ण आवास है, और उनके संरक्षण के लिए शांत माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है। प्रशासन ने बताया कि आसपास के गांवों और होटलों में बजने वाले डीजे व अन्य तेज ध्वनि वाले उपकरण जंगल के जीवों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 तथा राजस्थान ध्वनि नियंत्रण अधिनियम, 1963 के तहत मिली कानूनी शक्तियों का प्रयोग कर ये प्रतिबंध लागू किए हैं।
नियमों का उल्लंघन करना पड़ेगा महंगा
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके ध्वनि या लेज़र उपकरण तुरंत जब्त कर लिए जाएंगे और कार्यक्रम स्थल के मालिक या संचालक पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। पुलिस और संबंधित विभागों को भी निर्देश दिए गए हैं कि इस आदेश का सख्ती से पालन कराया जाए। काफी समय से प्रकृति प्रेमी और पर्यावरण कार्यकर्ता रणथंभौर क्षेत्र में पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों से बढ़ते शोर को लेकर चिंता जताते रहे हैं, और यह कदम उसी समस्या के समाधान की दिशा में देखा जा रहा है।
(इनपुट - भाषा)
