जयपुर

त्रेता के बाद कलियुग में भी मानव-वानर का अनूठा प्रेम; चित्तौड़गढ़ में बंदर का इंसानों की तरह अंतिम संस्कार, 11 लोगों ने किया पिंडदान

चित्तौड़गढ़ के धीरजी का खेड़ा गांव से मानवता और आस्था से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां ग्रामीणों ने एक वानर को परिवार का सदस्य मानते हुए उसकी मृत्यु पर इंसानों की तरह अंतिम संस्कार किया। यह घटना मानव और पशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव और भक्ति का दुर्लभ उदाहरण है।

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चित्तौड़गढ़ में बंदर का मानव जैसा अंतिम संस्कार (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)

Human Monkey Bond in India: त्रेता युग से ही मानव-वानर प्रेम की रीत चली आ रही है। जहा वानरों की सेना लेकर ही भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की थी और इन्हीं वानरों ने विशालकाय सागर पर पुल बनाने में भी अपने स्वामी का साथ सच्ची निष्ठा और भक्ति से दिए था। खैर अगर बात आज के युग की करें तो चित्तौड़गढ़ जिले के धीरजी का खेड़ा गांव से एक अनोखा और भावनात्मक मामला सामने आया है, जहां ग्रामीणों ने एक वानर को परिवार का सदस्य मानते हुए उसकी मृत्यु के बाद वही सारे संस्कार किए जो आमतौर पर किसी इंसान के निधन पर किए जाते हैं। दो साल पहले यह वानर गांव के खाकल देव जी मंदिर में आकर रहने लगा था और धीरे-धीरे गांव के लोगों और श्रद्धालुओं से घुल-मिल गया।

वैदिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार

बताया जा रहा है कि लोग उसे फल-भोजन देने लगे और वह मंदिर की दिनचर्या का हिस्सा बन गया। पूजा और आरती के समय वह मंदिर में शांत बैठा रहता और कभी-कभी श्रद्धालुओं की गोद में बैठकर स्नेह भी जताता था। उसके इस मिलनसार व्यवहार ने उसे गांव के लोगों के दिल में एक खास स्थान दिला दिया और वे उसे अपने परिवार का सदस्य मानने लगे। श्राद्ध पक्ष के पहले दिन ही वानर की मृत्यु हो गई, तो गांववालों ने उसका वैदिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया। इस अवसर पर गांव के 11 लोगों ने मुंडन कराया और पिंडदान किया।

मानव-वानर प्रेम का दुर्लभ उदाहरण

वानर की अस्थियों को मातृकुंडिया ले जाकर विधिपूर्वक विसर्जित भी किया गया। परंपरा अनुसार, मुंडन कराने वाले 11 लोगों का पगड़ी दस्तूर किया गया और पूरे गांव में भंडारे का आयोजन भी हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि ये सभी 11 लोग भगवान हनुमान के भक्त हैं और उनके लिए यह वानर सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का प्रतीक बन चुका था। इस पूरे प्रकरण को गांव में मानव-वानर प्रेम का दुर्लभ और प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।

Lakhveer Singh Shekhawat
लखवीर सिंह शेखावतauthor

पत्रकारिता में पिछले सात साल से सक्रिय हैं, वर्तमान में Times Now नवभारत में राजस्थान ब्यूरो हेड हैं। इससे पहले, ज़ी मीडिया और न्यूज़18 नेटवर्क के राजस्थान चैनल के लिए दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य किया है। उन्होंने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से बीजेएमसी की डिग्री प्राप्त की और राजस्थान यूनिवर्सिटी से एमजेएमसी में डिग्री हासिल की है। राजस्थान से संबंधित समाचारों और ख़बरों पर विशेष पकड़ रखते हैं। साथ ही देश की प्रमुख राजनीतिक घटनाओं को कवर करने में भी विशेषज्ञता हासिल है।

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