Jaipur Civic Polls Voting: जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में आज सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हो गया है। इस चुनाव में कुल 723 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जो नगर निगम के सभी चुनावी मैदानों में सबसे अधिक संख्या है। शहर के 24 लाख 23 हजार से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर यह तय करेंगे कि अगले कार्यकाल में उनके वार्ड का प्रतिनिधित्व किसके हाथों में होगा। मतदान को लेकर जयपुर में कुल 2,256 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जहां सुबह से ही वोटिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव मैदान में बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, निर्दलीय उम्मीदवारों और विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रत्याशी भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। मतदाताओं के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि आने वाले कार्यकाल में जयपुर के अलग-अलग वार्डों की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। वहीं, राजस्थान स्थानीय निकाय चुनाव के दूसरे और आखिरी चरण के तहत उदयपुर में भी वोटिंग जारी है।
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- नगर निकाय चुनावों के लिए मतदान जारी; नगर निगम और दो नगर परिषदों के लिए सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी वोटिंग
14 सितंबर को आएंगे रिज्लट
जयपुर नगर निगम चुनाव में चार वार्ड ऐसे हैं, जहां 10 से अधिक उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं, 16 वार्डों में बीजेपी और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं, जिससे इन सीटों पर सीधा मुकाबला माना जा रहा है। चुनाव के नतीजे 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। परिणाम आने के बाद महापौर और उप महापौर के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नगर निगम के 150 वार्डों के आरक्षण की व्यवस्था के तहत 50 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। मतदान के लिए जयपुर में कुल 2,256 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। इनमें से 652 बूथों को क्रिटिकल बूथ की श्रेणी में रखा गया है, जहां सुरक्षा और मतदान व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं।
जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस ने लगभग सभी वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं। दोनों प्रमुख दलों की ओर से 149-149 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनके अलावा 425 उम्मीदवार निर्दलीय, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला काफी रोचक और बहुकोणीय नजर आ रहा है।
मतदान से पहले बुधवार को चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में प्रत्याशियों ने मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। वार्डों में दिनभर जनसंपर्क अभियान, रैलियां, नुक्कड़ सभाएं और डोर-टू-डोर कैंपेन चलता रहा। उम्मीदवारों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए लोगों से समर्थन और वोट की अपील की। कहीं खराब सड़कें और सीवर व्यवस्था चुनावी मुद्दा बनी, तो कहीं सफाई और पेयजल की समस्या को लेकर प्रत्याशियों ने मतदाताओं का ध्यान खींचा। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण और आवारा पशुओं की समस्या भी कई वार्डों में प्रचार के दौरान प्रमुख मुद्दों में शामिल रही। प्रत्याशियों ने स्थानीय समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाते हुए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।
