इंदौर दूषित पानी से 15 की मौत के बाद राहत भरी खबर;भागीरथपुरा के सैंपल में नहीं मिले खतरनाक कीटाणु
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 4, 2026, 04:15 PM IST
राज्य के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लैब रिपोर्ट अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव तथा संभागीय आयुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े के नेतृत्व में किए गए क्लोरीनेशन और अन्य सुधारात्मक उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
इंदौर दूषित पानी मामला (IANS)
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी के संकट के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। श्री औरोबिंदो मेडिकल कॉलेज और पीजी इंस्टीट्यूट की हालिया लैब रिपोर्ट में इलाके से लिए गए पानी के पांचों सैंपल में पानी से फैलने वाली प्रमुख खतरनाक बीमारियों के कीटाणु नहीं पाए गए हैं। राज्य के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस लैब रिपोर्ट को अपने एक्स अकाउंट पर शेयर किया है।
राज्य के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने यह लैब रिपोर्ट अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने लिखा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव तथा संभागीय आयुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े के नेतृत्व में किए गए क्लोरीनेशन और अन्य सुधारात्मक उपायों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
रिपोर्ट में क्या मिले नतीजे
4 जनवरी की इस रिपोर्ट में सेंट्रल क्लिनिकल मॉलिक्यूलर लैबोरेटरी द्वारा आरटी-पीसीआर तकनीक से भागीरथपुरा से लिए गए पानी के नमूनों की जांच की गई। सभी पांच सैंपल (एस-01 से एस-05), जो 25-25 मिलीलीटर की साफ बोतलों में एकत्र किए गए थे, खतरनाक बैक्टीरियल और वायरल पैथोजन के लिए नेगेटिव पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, ई. कोलाई O157, जेनेरिक ई. कोलाई, विब्रियो कोलेरा, साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया के साथ-साथ रोटावायरस और एंटरोवायरस जैसे वायरल पैथोजन भी सैंपल में नहीं मिले। लैब ने स्पष्ट किया कि आरटी-पीसीआर जांच में टारगेट किए गए सभी बैक्टीरियल और वायरल पैथोजन के लिए नतीजे नेगेटिव रहे हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सलाह दी गई है कि पानी की गुणवत्ता की पूरी पुष्टि के लिए कल्चर-बेस्ड माइक्रोबायोलॉजिकल जांच और नियमित फिजिको-केमिकल टेस्टिंग आगे भी जारी रखी जानी चाहिए।
15 की मौत का दावा
यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए उस गंभीर संकट के बाद आई है, जब पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज मिल जाने से इलाके में बड़े पैमाने पर डायरिया और उल्टी के मामले सामने आए थे। आरोप है कि एक पुलिस चौकी के शौचालय के पास पाइपलाइन लीकेज और ठीक से सेप्टिक टैंक न होने के कारण सीवेज पानी की सप्लाई में मिल गया था। स्थानीय लोगों ने लंबे समय से बदबूदार और गंदे नल के पानी की शिकायत की थी। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, स्थानीय नागरिकों ने इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में हुई इस घटना में छह माह के बच्चे समेत 15 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है। विभाग के मुताबिक,इस प्रकोप में केवल चार लोगों की मौत हुई है। जिनमें से कई को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
मामले में जांच जारी, एहतियात बरत रहा प्रशासन
फिलहाल, प्रशासन ने लीकेज की मरम्मत कर दी है, प्रभावित इलाके में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। लापरवाही के आरोप में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है। हालांकि पहले दूसरी लैब रिपोर्ट्स में कुछ सैंपल में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन इंदौर के एक प्रमुख संस्थान द्वारा किए गए इस एडवांस्ड आरटी-पीसीआर टेस्ट से फिलहाल जांचे गए सैंपल में खतरनाक पैथोजन की मौजूदगी नहीं पाई गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर लोगों से अभी भी पानी उबालकर पीने या टैंकर के पानी का इस्तेमाल करने की अपील की है।
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