Monsoon Update 2026: भारत में इस साल मई के महीने ने अपनी तपिश से ज्यादा अपनी 'असामान्य ठंडक' से लोगों को हैरान किया है। लेकिन मौसम के इस बदले मिजाज के बीच एक बहुत बड़ी और सुखद खबर आ रही है। भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहा जाने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) अपनी तय समय सीमा पर आगे बढ़ रहा है। भारत मौसम विभाग (IMD) और वैश्विक संकेतों के अनुसार, इस बार मानसून के 1 जून के आसपास केरल तट पर पहुंचने की प्रबल संभावना है।
ऑस्ट्रेलिया का भारत के मानसून से क्या है कनेक्शन?
अक्सर हमें लगता है कि दूसरे देशों के मौसम का हमसे क्या लेना-देना, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के लिए ऑस्ट्रेलिया की एक घोषणा भारत के लिए सबसे बड़ा संकेत होती है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के मौसम ब्यूरो (The Bureau of Meteorology) ने घोषणा की है कि वहां का 'उत्तरी बारिश का मौसम' (Wet Season) आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। दरअसल, धरती के चारों ओर बादलों और बारिश की एक अदृश्य बेल्ट होती है जो सूरज के साथ उत्तर से दक्षिण की ओर घूमती रहती है। जब ऑस्ट्रेलिया में बारिश खत्म होती है, तो यह बेल्ट आजाद होकर उत्तर की ओर यानी भारत की तरफ बढ़ने लगती है। अभी यह बेल्ट मालदीव को पार कर चुकी है और श्रीलंका और अंडमान-निकोबार की ओर बढ़ रही है। ऐसे में समय से मानसून के भारत में पहुंचने की उम्मीद बढ़ी है।
अंडमान और केरल: मानसून की पहली दस्तक
ऐतिहासिक रूप से, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मानसून का पहला पड़ाव होते हैं। मौजूदा संकेतों के अनुसार, यहां मानसून आने में अब महज दो हफ्ते का समय शेष है। इसके बाद, 1 जून के आसपास इसके केरल तट पर टकराने की उम्मीद है।
प्री-मानसून गतिविधियों ने दी आहट
दक्षिण भारत के राज्यों, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और माहे में अगले सात दिनों तक गरज के साथ बारिश का पूर्वानुमान है। केरल में बिजली कड़कने और बादलों की गर्जना इस बात का सबूत है कि मानसून का मंच तैयार हो चुका है। वहीं उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में अचानक आंधी, ओलावृष्टि और गर्मी का उतार-चढ़ाव इस बात का संकेत है कि मौसम बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
अनिश्चितता के बादल: स्काइमेट की राय
जहां एक ओर मानसून को लेकर संकेत सकारात्मक दिख रहे हैं, वहीं निजी संस्था स्काइमेट वेदर (Skymet Weather) ने थोड़ा सतर्क रहने की सलाह दी है। स्काइमेट के अनुसार, विभिन्न वेदर मॉडल्स के बीच अभी पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि श्रीलंका के पास बनने वाला सिस्टम भारी 'प्री-मानसून' बारिश तो कराएगा, लेकिन इससे मानसून के आधिकारिक आगमन में थोड़ी देरी भी हो सकती है। अगले 2-3 दिनों का समुद्री हवाओं का दबाव ही असली तस्वीर साफ करेगा, ऐसे में इंतजार करना बेहतर विकल्प है।
